अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध 39 दिनों तक चला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मंगलवार, 7 अप्रैल को ईरान के पावर प्लांट पर हमला करने की चेतावनी दी थी, लेकिन डेडलाइन से ठीक पहले ट्रंप ने अगले दो हफ्ते के लिए युद्धविराम की घोषणा कर दी।
मंगलवार को ईरान पर होने वाले हमले पर पूरी दुनिया की टिगाहें टिकी थीं। ट्रंप ने हमले की डेडलाइन से कुछ घंटे पहले भी एक पोस्ट शेयर किया था, जिसमें बताया था कि अमेरिका के हमले से एक पूरी सभ्यता नष्ट हो जाएगी। ट्रंप के इस एलान से ईरान के साथ ही पूरी दुनिया में डर का माहौल बन गया।
डेडलाइन से पहले सीजफायर
ट्रंप ने हमले की डेडलाइन से पहले ट्रुथ सोशल पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘मैं दो हफ्तों की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले को रोकने पर सहमत हूं। यह एक दो-तरफा ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) होगा।
ट्रंप ने आगे बताया, ‘ऐसा करने का कारण यह है कि हमने अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को पहले ही पूरा कर लिया है और उनसे आगे भी बढ़ गए हैं। साथ ही, हम ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति और मध्य-पूर्व में शांति सुनिश्चित करने वाले एक निर्णायक समझौते की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं।’
ट्रंप के सीजफायर की घोषणा के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यह रणनीतिक विराम था या ‘Madman Theory’।
क्या है Madman Theory?
मैडमैन थ्योरी अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक अवधारणा है, जिसका उपयोग यूनाइटेड स्टेट्स के 37वें राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने वियतनाम युद्ध के दौरान किया था। इस थ्योरी के जरिए यदि कोई नेता विरोधियों को यह विश्वास दिलाता है कि वह तर्कहीन, अस्थिर और कोई भी कदम उठाने को तैयार है, यहां तक कि परमाणु युद्ध ही छेड़ सकता है, तब विपक्षी अधिक सावधानी से बातचीत करने के लिए तैयार हो जाते हैं या मांगों को मान सकते हैं।
राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की मैडमैन थ्योरी के ऐतिहासिक रूप से इसे प्रभावी बनाने वाले तीन प्रमुख तत्व थे।
अनिश्चितता: निक्सन के सलाहकारों ने जानकारी को सावधानीपूर्वक सीमित रखा ताकि दुश्मन उनकी धमकियों को तुरंत समझ न सके।
तर्कसंगत प्रतिद्वंद्वी: दूसरे पक्ष को गलत अनुमान का डर था और उसे सतर्क रहना पड़ता था।
संयम से प्राप्त विश्वसनीयता: नेता के सामान्य तौर पर अनुशासित व्यवहार ने कभी-कभार दी जाने वाली अत्यधिक धमकियों को विश्वसनीय बना दिया।
निक्सन ने 1969 में उत्तरी वियतनाम को बातचीत के लिए मजबूर करने के लिए अमेरिकी सेना को परमाणु अलर्ट पर रखा था। निक्सन के इस पैंतरे ने इस बात को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी कि निक्सन किस हद तक जा सकते हैं, जिससे उनके विरोधियों पर दबाव बढ़ गया।
ट्रंप की Madman Theory
युद्ध के दौरान ही डोनल्ड ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके थे कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई बार ट्रंप की बात को नकारा। वहीं अब US राष्ट्रपति मैडमैन थ्योरी के रास्ते पर चलते नजर आए।
ईरान के प्रति ट्रंप का रवैया इसी ऐतिहासिक रणनीति की झलक दिखाता है, लेकिन इसमें आधुनिक बदलाव भी हैं। सोशल मीडिया, इंटरव्यू और पोस्ट के जरिए सार्वजनिक रूप से गालियों से भरी धमकियां देकर, उनका मकसद तेहरान को डराना और उन पर युद्धविराम के लिए राजी होने का दबाव डालना था।
अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकार उनकी धमकियों को बेहद आक्रामक, लेकिन संभावित रूप से रणनीतिक मानते हैं।
वाइकाटो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अल गिलेस्पी ने RNZ को दिए एक इंटरव्यू में समझाया, ‘मैडमैन थ्योरी में तर्कहीन और मनमौजी तरीके से व्यवहार करना और युद्ध खत्म करने के लिए किसी भी हद तक जाने की धमकी देना शामिल है। इसका मूल विचार यह है कि आपको पता नहीं होता कि वह व्यक्ति ऐसा करेगा या नहीं और विरोधी डरकर कोई समझौता करने पर मजबूर हो जाता है।’
गिलेस्पी ने इस बात पर जोर दिया, ‘ईरान जैसे तानाशाही शासन के मामले में, वे अक्सर ऐसी धमकियों से नहीं डरते। लेकिन यह रणनीति इस बात पर निर्भर करती है कि विरोधी उस धमकी से डरे।’
ट्रंप की पावर प्लांट पर धमकी के बाद ईरान ने भी दो हफ्ते के लिए सीजफायर का एलान कर दिया। इस सीजफायर के बाद अब दोनों देशों के बीच युद्धविराम को लेकर व्यापक समझौता तैयार हो रहा है।