सिंगापुर संधि क्या है, जो सुलझा सकती है जुबिन गर्ग मौत का रहस्य; गुवाहाटी से दिल्ली तक क्यों मची हलचल…

केंद्र सरकार ने असम के मशहूर गायक जुबिन गर्ग की मौत की जाँच में मदद के लिए भारत-सिंगापुर संधि को फिर से सक्रिय करने का फैसला किया है, ताकि इस मौत की गुत्थी सुलझाई जा सके।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि केंद्र ने दोनों देशों के बीच साल 2005 में हुए परस्पर कानूनी सहायता संधि (MLAT) के तहत गायक जुबिन गर्ग की मौत की जांच में दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश सिंगापुर से औपचारिक रूप से सहयोग का अनुरोध किया है।

असम सरकार ने सोमवार को गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था और सिंगापुर में गायक की मौत के संबंध में देश के साथ संधि के प्रावधानों की मदद लेने मांग की थी।

मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘गृह मंत्रालय ने अब हमारे प्रिय जुबिन के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के संबंध में असम पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी को लेकर परस्पर कानूनी सहायता संधि के तहत औपचारिक रूप से सहयोग मांगा है।’’

असम के अधिकारी सिंगापुर पहुंचे

सरमा ने सोमवार को कहा था कि एमएलएटी के प्रावधानों का उपयोग होने पर सिंगापुर के अधिकारियों से पूर्ण सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा, मामले के विवरण तक पहुंच प्राप्त होगी और आरोपियों को वापस लाने एवं न्याय सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

असम सरकार ने गायक की मौत की जांच के लिए विशेष पुलिस महानिदेशक (DGP) एमपी गुप्ता के नेतृत्व में 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

सरमा ने कहा कि असम पुलिस के दो अधिकारी सिंगापुर में संबंधित अधिकारियों से सहायता लेने के लिए पहले ही सिंगापुर पहुंच गये थे।

52 वर्षीय गायक गर्ग की 19 सितंबर को सिंगापुर में एक नौका यात्रा के दौरान समुद्र में डूबने से मौत हो गई थी। उन्हें वहां अगले दिन श्यामकानु महंत द्वारा आयोजित पूर्वोत्तर भारत महोत्सव में प्रस्तुति देनी थी लेकिन उससे एक दिन पहले ही उनकी मौत हो गई थी। बुधवार को उनकी तेरहवीं है।

क्या है भारत-सिंगपुर संधि?

जब कभी किसी भारतीय नागरिक की या भारत से संबंधित कोई आपराधिक गतिविधि विदेशों में घटित होती है तो उस देश के साथ हुई कानूनी सहायता संधि के जरिए भारत वहां से साक्ष्यों को जुटाता है।

इस संधि के तहत विदेशों में संदिग्ध मौत, धोखाधड़ी, साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग या मादक पदार्थों की तस्करी समेत किसी भी अपराध के मामले में जांच एजेंसियों के उस देश से सबूत जुटा सकती हैं।

इस प्रक्रिया में जांच टीम गवाहों के बयान दर्ज कर सकती हैं, फॉरेंसिक रिपोर्ट इकट्ठी कर सकती हैं, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज जो जांच में सहायक हैं, उसे पाने के लिए इस सहायता संधि का इस्तेमाल करती हैं।

भारत और सिंगापुर के बीच साल 2005 में इन्हीं उद्देश्यों को हासिल करने के मकसद से एक पारस्परिक संधि हुई थी, जो दोनों देशों के बीच म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस इन क्रिमिनल मैटर्स (MLAT) का ढांचा तैयार करता है।

जुबिन गर्ग की सिंगापुर में हुई संदिग्ध मौत के मामले में यह संधि प्रासंगिक हो गई है क्योंकि इसी के जरिए दोनों देशों के सक्षम प्राधिकार मामले की जांच कर सकेंगे और न्याया सुनिश्चित हो सकेगा।

संधि कैसे करेगा काम?

इस संधि की मदद से सिंगापुर गए असम के अधिकारी वहां से साक्ष्य जमा कर सकेंगे। वहां संबंधित लोगों का बयान दर्ज कर सकेंगे। इसके अलावा वहां सर्च या सीजर की कार्रवाई कर सकेंगे।

किसी व्यक्ति की उपस्थिति का अनुरोध या हिरासत में व्यक्ति के ट्रांजिट की व्यवस्था कर सकेंगे। इतना ही नहीं किसी भी तरह के कानूनी दस्तावेज या रिकॉर्ड प्रोडक्शन का ऑर्डर भी हासिल कर सकेंगे।

इस संधि के जरिए विदेशी जब्ती आदि के आदेश पर अमल में भी मदद मिलेगी।

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