क्या है मार्क-48 टॉरपीडो? अमेरिका ने इसी हथियार से ईरानी युद्धपोत को किया ध्वस्त…

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते तनाव अब केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि एशिया तक भी पहुंच गया है।

अमेरिका अब ईरान के युद्धपोत को निशाना बना रहा है। अमेरिका के ईरान पर हमले से 30 से ज्यादा युद्धपोत तबाह हुए हैं।

ईरान का शक्तिशाली युद्धपोत तबाह

अमेरिकी नौसेना की घातक पनडुब्बी ने मंगलवार को हिंद महासागर में एक ही टारपीडो मार्क-48 का इस्तेमाल करके एक ईरानी युद्धपोत आइआरआइएस डेना (IRIS Dena) को डुबा दिया।

डेना ईरान के सबसे नए युद्धपोतों में से एक था, जो गहरे पानी में गश्त करता था व भारी तोपों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, जहाज-रोधी मिसाइलों और टारपीडो से लैस था। इस युद्धपोत पर एक हेलीकॉप्टर भी था।

ईरान ने बताया कि डेना पर हुए हमले में उसके 87 नाविक मारे गए। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसे समुद्र में अमेरिका की क्रूरता बताया।

डेना पर कैसे हुआ हमला?

मार्क- 48 का उपयोग IRIS डेना को डुबोने के लिए किया गया था। इसे रेडियो मार्गदर्शन के माध्यम से मैन्युअल रूप से या ध्वनिक होमिंग जैसी तकनीकों के माध्यम से अपने लक्ष्य तक पहुंचाया जाता है।

मार्क-48 टारपीडो आधुनिक तकनीक MK-48 ADCAP जैसी बेहतर मार्गदर्शन प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रणोदन की सुविधा से लैस होते हैं।

मार्क-48 का वजन लगभग 1,700 किलोग्राम होता है और ये करीब 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं। यह एक्टिव और पैसिव सोनार का उपयोग करके लक्ष्यों का पता लगाता है और सीधे जहाज की नींव पर निशाना लगाता है।

सबसे पहले मार्क-48 टारपीडो जहाज के नीचे जाता है और 227 किलोग्राम टीएनटी की ऊर्जा से जहाज के नीचे विस्फोट करता है। विस्फोट से गैस के विशाल बुलबुले जहाज की नींव को तोड़ने की क्षमता रखते हैं। इस विस्फोट से जहाज दो या दो से अधिक टुकड़ों में बिखर जाता है।

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