क्या नपुंसक थे खामेनेई के बेटे मोज़तबा? रिपोर्ट में दावा—इलाज के लिए गए थे लंदन…

ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद 88 सदस्यों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा होसैनी खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है।

मोजतबा खामेनेई के अतीत से जुड़े कुछ पुराने और विवादित राजनयिक खुलासे कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं।

दरअसल, राजनयिक खुलासों से यह पता चला अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा को अपने शुरुआती वैवाहिक जीवन में कुछ व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं (नपुंसकता) का सामना करना पड़ा था, जिसके लिए उन्हें लंदन में इलाज कराना पड़ा था।

राजनयिक दस्तावेजों में हुआ खुलासा

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह बात विकीलीक्स द्वारा 2000 के दशक के अंत में प्रकाशित अमेरिकी राजनयिक दस्तावेजों से सामने आई है।

मोजतबा खामेनेई को अपनी पत्नी के साथ गर्भधारण करने में कठिनाई होने के बाद लंदन के वेलिंगटन और क्रॉमवेल अस्पतालों में कई बार इलाज कराना पड़ा।

मोजतबा खामेनेई ने कम से कम चार बार क्लीनिक में भर्ती होने पड़ा था, जिसमें एक बार दो महीने का लंबा प्रवास भी शामिल है, जिसके बाद आखिरकार वह अपनी पत्नी को गर्भवती करने में कामयाब हुS।

मोजतबा खामेनेई के साथ यह समस्या दो अस्थायी विवाह के बाद आई, जो इस्लामी कानून के तहत अनुमत हैं ताकि पुरुष और महिलाएं धार्मिक रूप से अच्छे रहते हुए बिना किसी प्रतिबद्धता के यौन संबंध बना सकें।

बिट्रेन में हुआ था इलाज

दो अस्थायी विवाह के बाद मजलिस के पूर्व अध्यक्ष हदाद आदेल की बेटी से मोजतबा का विवाह हुआ। मोजतबा के फैमिली को उनसे जल्दी संतान की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें अपनी नपुंसकता के लिए चार बार ब्रिटेन जाना पड़ा।

जहां इलाज के दौरान मोजतबा की नपुंसकता दूर हो गई और उनकी पत्नी गर्भवती हो गई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उसके कितने बच्चे हुए।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई

मोजतबा खामेनेई (56 वर्ष) एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं और लंबे समय से पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाते आए हैं। वे IRGC और बसिज मिलिशिया से गहरे जुड़े हुए माने जाते हैं।

हालांकि, इस नियुक्ति पर विवाद है क्योंकि ईरान की इस्लामी क्रांति की मूल भावना में वंशानुगत उत्तराधिकार को खारिज किया जाता है, और कई कट्टरपंथी भी इसे “राजशाही जैसा” मानकर विरोध कर सकते हैं।

मोजतबा की धार्मिक योग्यता (हुज्जतुल इस्लाम रैंक) को भी सर्वोच्च नेता के पद के लिए अपर्याप्त माना जा रहा है, लेकिन आईआरजीसी के समर्थन ने इसे मुमकिन बना दिया।

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