प्रवीण नांगिया (ज्योतिष सलाहकार):
विनायक चतुर्थी के दिन विधि- विधान से भगवान गणेश की अराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
हिंदू धर्म में विनायक चतुर्थी का बहुत अधिक महत्व होता है।
इस समय फाल्गुन का महीना चल रहा है। हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी पड़ती है। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। इस दिन विधि- विधान से भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है।
भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देव हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश का एक नाम विनायक भी है।
पौष माह की विनायक चतुर्थी 3 मार्च, सोमवार यानी आज है। इस पावन दिन का बहुत अधिक महत्व होता है। विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा- अर्चना करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखने से विघ्न दूर हो जाते हैं।
आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी पूजा- विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और सामग्री की पूरी लिस्ट…
मुहूर्त-
फाल्गुन, शुक्ल चतुर्थी प्रारम्भ – 09:01 पी एम, मार्च 02
फाल्गुन, शुक्ल चतुर्थी समाप्त – 06:02 पी एम, मार्च 03
पूजा सामग्री लिस्ट : लकड़ी चौकी, पीला कपड़ा, जनेऊ, पान का पत्ता, लौंग, इलायची, गंगाजल, दूर्वा, रोली, सिंदूर, अक्षत, हल्दी, मौली, इत्र, गाय का घी, मोदक, चीनी समेत सभी सामग्री एकत्रित कर लें।
पूजा विधि :
संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठें।
स्नानादि के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करें।
घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
एक चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाएं। उस पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें।
अब गणपति बप्पा की विधि-विधान से पूजा करें।
गणेशजी के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
गणेशजी को फल, फूल,दूर्वा, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
गणेशजी के बीज मंत्रों का जाप करें। उन्हें मोदक या मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
भगवान गणेश को दूर्वा अतिप्रिय होता है। जो भी व्यक्ति भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करता है, भगवान गणेश उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
भगवान गणेश की आरती करें और भोग लगाएं। आप गणेश जी को मोदक, लड्डूओं का भोग लगा सकते हैं।