प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
हिंदू धर्म में दीपक जलाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
दीपक की लौ को ज्ञान और समृद्धि के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पूजा के दौरान भगवान से सामने आपको किस तरह दीपक (Deepak Jalane ke Niyam) जलाना चाहिए, ताकि आपको पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
क्या है दीपक जलाने के सही नियम?
अगर आप गाय के घी का दीपक जला रहे हैं, तो इसे भगवान के बाईं ओर (Left Side) रखना शुभ माना गया है। घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती का उपयोग करना श्रेष्ठ होता है।
वहीं अगर आप आप सरसों या तिल के तेल का दीपक जला रहे हैं, तो इसे भगवान के दाहिनी ओर (Right Side) रखें। इसमें लाल धागे या कलावा से बनी बत्ती का उपयोग करना शुभ होता है।
कौन-सी दिशा है सही
दीपक की लौ किस दिशा (Vastu Directions) में है, इसका ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। वास्तु शास्त्र में दीपक जलाने के लिए उत्तर दिशा या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे उत्तम माना गया है।
इसके साथ ही दीपक की बत्ती का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। लेकिन साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि दीपक की बाती को दक्षिण या फिर पश्चिम दिशा में रखने से बचना चाहिए। क्योंकि वास्तु के अनुसार, ऐसा करना उचित नहीं माना गया।
इस बातों का रखें विशेष ध्यान
पूजा के दौरान दीपक को भगवान की प्रतिमा या मूर्ति के बिल्कुल सामने नहीं रखना चाहिए और न ही बहुत दूरी पर रखना चाहिए। दीपक को हमेशा एक संतुलित दूरी बनाए रखें। अगर आप धातु जैसे पीतल, तांबा या चांदी से बने दीपक का उपयोग कर रहे हैं, तो इनकी सफाई का भी पूरा ध्यान रखें।
न करें ये गलतियां
- पूजा के बीच में दीपक का बुझना शुभ संकेत नहीं माना जाता, इसलिए दीपक में पर्याप्त घी या तेल का उपयोग करना चाहिए
- पूजा में कभी भी खंडित दीपक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, वरना इससे शुभ परिणाम नहीं मिलते।
- गंदा या जला हुआ दीपक घर में नकारात्मकता ला सकता है। इसलिए इस तरह के दीपक का इस्तेमाल करने से भी बचें।