प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। घर के मंदिर में वास्तु शास्त्र के नियम पालन जरूर करना चाहिए।
इससे जातक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। परिवार में सुख-शांति और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि मंदिर से जुड़े वास्तु टिप्स, जिनका पालन करने से घर में खुशियों का आगमन होता है।
मंदिर के लिए कौन-सी दिशा है शुभ?
ऐसा माना जाता है घर का मंदिर शुभ दिशा में होने से पूजा सफल होती है और परिवार के सदस्यों पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।
इसलिए मंदिर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और काम में कोई बाधा नहीं आती है। एक बात का खास ध्यान रखें कि मंदिर को दक्षिण दिशा और बेडरूम में नहीं होना चाहिए और सीढ़ियों के नीचे मंदिर नहीं होना चाहिए।
किस तरफ होना चाहिए आपका मुख?
वास्तु के अनुसार, पूजा करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
मंदिर में साफ-सफाई का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी का वास साफ-सफाई वाली जगह पर होता है। इसलिए मंदिर में साफ-सफाई का ध्यान रखें। मंदिर में बासी फूल, सूखी मालाएं न रखें। इन चीजों को पवित्र नदी में बहा दें।
दीपक से जुड़े नियम
मंदिर में दीपक को प्रभु की प्रतिमा को सामने रखना चाहिए। इसके लिए दक्षिण-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इसके अलावा मंदिर में कलश को भगवान के दाहिने हाथ की तरफ रखना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
अक्सर लोग मंदिर में अपने पितरों की तस्वीर को रखते हैं, लेकिन इस तरह की गलती को भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इससे जातक को वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। घर की दक्षिण दिशा को पितरों की मानी जाती है। इस दिशा में पितरों की तस्वीर लगानी चाहिए।
मंदिर में न रखें इस तरह की तस्वीर
मंदिर में कभी भी देवी-देवताओं के उग्र रूप की तस्वीर को नहीं रखना चाहिए। जैसे- महादेव तांडव करते, हनुमान जी युद्ध करते हुए की प्रतिमा।