यूपी बोर्ड 2026: पहले दिन जांची गईं 9.42 लाख कॉपियां, कमांड सेंटर से हो रही ऑनलाइन निगरानी…

हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अंकेक्षक व उप प्रधान परीक्षक (डीएचई) बनाए जाने के कुछ प्रधानाचार्यों के विरोध के बीच बुधवार को पहले दिन 9.42 लाख कापियां जांची गईं।

70,025 परीक्षकों ने मूल्यांकन कार्य किया, जिसकी यूपी बोर्ड मुख्यालय में बने राज्य स्तरीय कमांड एंड कंट्रोल रूप से आनलाइन निगरानी कराई गई। मूल्यांकन शुरू किए जाने से पहले परीक्षकों को केंद्र पर बताया गया कि क्या नहीं करना है और क्या करना है, ताकि कोई त्रुटि न होने पाए।

दोनों कक्षाओं की करीब 2.60 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन एक अप्रैल तक पूरा किया जाना है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर बताया है कि सभी परीक्षक मूल्यांकन केंद्र पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करेंगे।

प्रतिदिन के लिए निर्धारित मानक हाईस्कूल में 50 व इंटरमीडिएट में 45 के अनुसार ही मूल्यांकन करें। प्रत्येक उत्तरपुस्तिका पर परीक्षक कोड व हस्ताक्षर अनिवार्य रूप से परीक्षक करेंगे।

पारिश्रमिक बढ़ाने के लिए अप्रत्याशित अधिक कापियां न जांचें, अन्यथा सतही मूल्यांकन मानकर कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानाचार्यों की ड्यूटी ऐच्छिक किए जाने की मांग

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री संतोष शुक्ल ने यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह को मांगपत्र देकर प्रधानाचार्यों को मूल्यांकन कार्य में ऐच्छिक सहभागिता दिए जाने की मांग की है। कहा है कि विद्यालयों में नए सत्र के लिए प्रवेश व वार्षिक गृह परीक्षा के परिणाम के तैयार कराए जा रहे हैं।

कालेजों में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत तथा नए सत्र के लिए निर्माण कार्य की देखरेख के साथ ही अन्य प्रशासनिक कार्य में व्यस्तता के कारण अंकेक्षण का कार्य कठिन प्रतीत हो रहा है। स्वैच्छिक की सुविधा पर किसी को परेशानी नहीं होगी।

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रधानाचार्यों को अंकेक्षक के रूप में लगाई गई ड्यूटी को पद की गरिमा के विपरीत बताते हुए इससे मुक्त किए जाने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *