आज का पंचांग 19 मार्च 2026: शुभ योगों में शुरू हुए चैत्र नवरात्र, जानें घटस्थापना का सही मुहूर्त…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

 आज यानी 19 मार्च से हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो गई है।

इस अवधि के दौरान मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना होती है। पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा करने से साधक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं।

हिंदू नववर्ष के दिन को महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल का समय समेत आदि जानकारी।

तिथि: अमावस्या / शुक्ल प्रतिपदा
मास: चैत्र
दिन: गुरुवार
संवत्: 2082

तिथि: अमावस्या – प्रातः 06 बजकर 52 मिनट तक
तिथि: शुक्ल प्रतिपदा – 20 मार्च प्रातः 04 बजकर 52 मिनट तक
योग: शुक्ल – 20 मार्च रात्रि 01 बजकर 17 मिनट तक
करण: नाग – प्रातः 06 बजकर 52 मिनट तक
करण: किंस्तुघ्न – सायं 05 बजकर 55 मिनट तक
करण: बव – 20 मार्च प्रातः 04 बजकर 52 मिनट तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय का समय: प्रातः 06 बजकर 26 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 32 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: प्रातः 06 बजकर 28 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: सायं 06 बजकर 54 मिनट पर

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सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: मीन राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: मीन राशि में स्थित हैं

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक
अमृत काल: रात्रि 11 बजकर 32 मिनट से रात्रि 01 बजकर 03 मिनट तक (20 मार्च)

आज के अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 02:00 बजे से सायं 03 बजकर 30 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 28 बजे से प्रातः 10 बजकर 58 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 06 बजकर 26 बजे से प्रातः 07 बजकर 57 मिनट तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र: 20 मार्च प्रातः 04 बजकर 05 मिनट तक
स्थान: 3°20’ मीन राशि से 16°40’ मीन राशि तक
नक्षत्र स्वामी: शनिदेव
राशि स्वामी: बृहस्पतिदेव
देवता: अहिर्बुध्न्य (गहरे जल के नाग देवता)
प्रतीक: शवपेटिका या अर्थी (मृत्यु के पश्चात प्रयुक्त होने वाला वाहन)
सामान्य विशेषताएं: शांत, एकांतप्रिय, सहायक, स्वतंत्र, कला-प्रेमी, तर्कशील, दयालु, प्रकृति-प्रेमी,

हिंदू नव वर्ष, गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्र 2026

नूतन वर्ष प्रारंभ: गुरुवार, 19 मार्च, 2026 
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 19 मार्च, 2026 को सुबह 06 बजकर 52 मिनट तक
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च, 2026 को सुबह 04 बजकर 52 मिनट तक
घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 52 मिनट से 07 बजकर 43 मिनट तक (अवधि: 50 मिनट) (Chaitra navratri 2026 Ghatasthapna Shubh Muhurt)
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक

1. नूतन वर्ष और नव संवत्सर

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए साल की शुरुआत होती है। इस दिन से विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 का संचालन शुरू होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन साठ वर्षों के चक्र में से एक नए संवत्सर का आरंभ होता है, जिसका अपना एक विशिष्ट नाम और महत्व है। उत्तर भारत में इसे नव संवत्सर या हिंदू नव वर्ष के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंचांग की गणना के अनुसार, चैत्र मास के पहले 15 दिन पिछले संवत में और शेष 15 दिन नए संवत में गिने जाते हैं।

2. गुड़ी पड़वा और उगादि

महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में इस दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है, वहीं कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसे उगादि कहते हैं। यह चंद्र-सौर कैलेंडर पर आधारित मराठी नव वर्ष है। चूंकि हिंदू धर्म में सौर कैलेंडर का भी महत्व है, इसलिए देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे पंजाब में बैसाखी और बंगाल में नब वर्ष के रूप में भी नया साल मनाया जाता है। इस दिन घरों में गुड़ी सजाई जाती है और जीवन के सही संचालन के लिए सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

3. चैत्र नवरात्र और घटस्थापना

नूतन वर्ष के पहले दिन से ही चैत्र नवरात्र का पावन पर्व शुरू होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत घटस्थापना से होती है, जो शक्ति की देवी माँ दुर्गा के आह्वान का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए, क्योंकि गलत समय पर की गई पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। घटस्थापना के लिए प्रतिपदा तिथि के दौरान दिन का प्रथम एक तिहाई हिस्सा सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। भक्त पूरी सहजता और श्रद्धा के साथ मां के नौ रूपों की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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