सड़कों पर फैल जाता था सन्नाटा, लोग काम छोड़कर एपिसोड का बेसब्री से इंतजार करते थे—ऐसा था इनके टीवी शो का जादू…

बलदेव राज (बी.आर.) चोपड़ा भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के महान निर्माता और निर्देशक थे. उन्होंने अपने पूरे करियर में दास्तान, तवायफ और बागबान जैसी कई शानदार फिल्में बनाईं.

उनका टीवी शो ‘महाभारत’ आज भी लोगों के जहन में जिंदा है. भले ही आज बीआर चोपड़ा हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अपनी फिल्मों और टीवी शो के जरिए आज भी वो हम सबके दिलों में जिंदा हैं. 

उनके करियर की शुरुआत फिल्म अफसाना से हुई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की और उन्हें पहचान दिलाई. 1955 में उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस ‘बीआर फिल्म्स’ स्थापित किया, जिसके तहत उन्होंने दिलीप कुमार और वैजयंती माला की फिल्म ‘नया दौर’ बनाई. इसके बाद उन्होंने गुमराह, कानून, साधना, पति-पत्नी और वो, हमराज, निकाह, कर्म, एक ही रास्ता और बाबुल जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी.

बीआर चोपड़ा को घर-घर में पहचान 1988 में उनके टीवी शो ‘महाभारत’ से मिली. उस समय जब टीवी हर घर में नहीं था, पूरा गांव एक घर में इकट्ठा होकर इस महाकाव्य को देखने आता था.

इस शो की लागत लगभग 9 करोड़ रुपए थी और यह टीआरपी के मामले में आज भी याद किया जाता है. लॉकडाउन के दौरान इसका प्रसारण फिर से हुआ और इसने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए.

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बीआर चोपड़ा का योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था. उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई दिशा और गंभीर विषयों पर आधारित कहानियों से समृद्ध किया. उनकी आखिरी फिल्म भूतनाथ थी.

1998 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान, दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया.

बीआर चोपड़ा का निधन 5 नवंबर 2008 को हुआ था, लेकिन उनके बनाए हुए सिनेमा और टीवी शो आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं. ‘महाभारत’ के निर्माता के रूप में उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा.

उनकी फिल्मों और टेलीविजन कृतियों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को भी दर्शकों तक पहुंचाया.

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