अनावश्यक मुकदमा दायर करने पर Supreme Court of India ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया…

 अनावश्यक मुकदमा दायर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है और उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

केंद्र सरकार ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक अधिकारी की बर्खास्तगी को रद करने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया और सजा को असंगत पाते हुए अधिकारी को बकाया वेतन भी देने का आदेश दिया।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ”हम यह समझने में असमर्थ हैं कि भारत सरकार ने हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश को चुनौती क्यों दी। हम हमेशा मुकदमे लंबित होने (पेंडेंसी) की बात सुनते हैं। सबसे बड़ा मुकदमेबाज कौन है? जुर्माना लगाया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा, ”यह क्यों नहीं सोचा जा सकता कि अगर हाई कोर्ट ने सजा को असंगत पाया और सभी आदेशों को रद कर दिया, तो हम सुप्रीम कोर्ट न जाएं? उसने मेडिकल लीव ली थी, लेकिन उसे अपने परिवार में एक सदस्य के भाग जाने की समस्या से भी निपटना था।”

सीआइएसएफ अधिकारी पर दो आरोप थे। एक, वह 11 दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहा। दूसरा, उसने एक महिला (सीआइएसएफ कांस्टेबल की बेटी) के साथ मुंबई से भागकर उसकी अपने छोटे भाई के साथ शादी में शामिल होकर अनुशासनहीनता का काम किया।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 11 दिनों तक वह स्वीकृत मेडिकल लीव पर था। जहां तक दूसरे आरोप का सवाल है, इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि प्रतिवादी के भाई ने संबंधित महिला से शादी की थी। इसलिए, प्रतिवादी की ओर से कोई कदाचार नहीं हुआ था।

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