Ukraine से Gaza Strip तक जारी युद्धों ने बढ़ाई हथियारों की खरीद की होड़, बिक्री में 27% की बड़ी बढ़ोतरी…

रूस‑यूक्रेन युद्ध (2022) और इजराइल‑गाजा युद्ध (2023) के चलते दुनिया में हथियारों की रेस पहले ही तेज हो चुकी थी।

अब ईरान युद्ध ने इस प्रतिस्पर्धा को और भड़का दिया है। बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण दुनियाभर के देशों ने अपने रक्षा बजट बढ़ाने शुरू कर दिए हैं, जिसका सीधा असर हथियार उद्योग की बिक्री पर पड़ा है।

2019 की तुलना में 2024 में वैश्विक हथियारों की बिक्री 44 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 56.3 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। इस दौरान हथियार उद्योग में करीब 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो ऑटोमोबाइल और फार्मा जैसे बड़े सेक्टरों से कहीं अधिक है।

टॉप‑10 हथियार कंपनियों में से सात अमेरिका की

दुनिया की टॉप‑10 हथियार कंपनियों में से सात अमेरिका की हैं। इन कंपनियों के पास कुल 76 लाख करोड़ रुपये के एडवांस ऑर्डर हैं, जिससे आने वाले कई वर्षों तक उनकी कमाई सुरक्षित मानी जा रही है।

लॉकहीड मार्टिन की 2024 में 5.80 लाख करोड़ रुपये की बिक्री रही, जबकि आरटीएक्स की बिक्री 4.35 लाख करोड़ रुपये रही। नॉर्थोप ग्रुम्मन, जनरल डायनेमिक्स, बोइंग और एल‑3 हैरिस भी अमेरिकी कंपनियों में शामिल हैं।

चीन की कैसिक और ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स भी टॉप‑10 हथियार कंपनियों में जगह बनाए हुए हैं। वहीं रूस की रोस्टेक ने भी एस‑400 और सुखोई विमानों की बिक्री से उल्लेखनीय मौजूदगी दर्ज कराई है। इन कंपनियों की बिक्री और ऑर्डर बुक लगातार बढ़ रही है।

अमेरिकी हथियार कंपनियों की लॉबिंग तेज

अमेरिकी हथियार कंपनियों की राजनीतिक पकड़ भी मजबूत होती जा रही है। 2025 में इन कंपनियों ने लॉबिंग पर 2,460 करोड़ रुपये खर्च किए, जो 2019 के मुकाबले 36 प्रतिशत अधिक है। इनमें से करीब 70 प्रतिशत लॉबिइस्ट पूर्व सैन्य जनरल और अधिकारी हैं।

2024 में वैश्विक सैन्य खर्च 9.4 प्रतिशत बढ़कर 225 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले 36 वर्षों में सबसे अधिक है। 2019 में यह खर्च 158 लाख करोड़ रुपये था। शीत युद्ध के बाद यह सबसे तेज वार्षिक वृद्धि मानी जा रही है।

2019 से 2024 के बीच हथियार उद्योग की ग्रोथ 27 प्रतिशत रही, जबकि इसी अवधि में ऑटोमोबाइल सेक्टर की ग्रोथ 12 प्रतिशत और फार्मा सेक्टर की कुल ग्रोथ 18 प्रतिशत ही रही। इससे साफ है कि युद्ध और सुरक्षा चिंताओं ने रक्षा उद्योग को सबसे तेज बढ़ने वाला सेक्टर बना दिया है।

यूक्रेन बना दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक

यूक्रेन युद्ध के बाद युद्ध की प्रकृति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टैंकों का दौर कमजोर पड़ा है और ड्रोन युद्ध का प्रमुख हथियार बनकर उभरे हैं। 2019 में ड्रोन इंडस्ट्री का आकार 45,000 करोड़ रुपये था, जो 2024 में बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

2019 में टॉप‑20 हथियार आयातकों में शामिल न रहने वाला यूक्रेन 2024 में 1.82 लाख करोड़ रुपये के सौदों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है। भारत 1.71 लाख करोड़ रुपये के आयात के साथ दूसरे स्थान पर है।

ब्रह्मोस से भारत की ग्लोबल एंट्री

ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री से भारत वैश्विक हथियार निर्यात लीग में शामिल हो चुका है। सरकार ने 2029 तक सालाना 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात और 25 लाख रोजगार सृजन का विजन रखा है। रक्षा उत्पादन में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 16,000 से अधिक स्टार्टअप्स इस सेक्टर से जुड़ चुके हैं।

भारतीय डिफेंस सेक्टर में भी बीते पांच वर्षों में तेज उछाल आया है। 2019 की तुलना में भारत का रक्षा निर्यात 131 प्रतिशत बढ़ा है। भारत अब एक ‘विश्वसनीय सप्लायर’ के रूप में उभरा है और ब्रह्मोस मिसाइल व पिनाका रॉकेट जैसे फुल‑प्लेटफॉर्म हथियार 85 देशों को निर्यात कर रहा है।

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