प्रवीण नांगिया (ज्योतिष सलाहकार):
आदिशक्ति माता वासंतिक नवरात्र में गज अर्थात हाथी पर सवार होकर आएंगी तथा महिष अर्थात भैंसे पर सवार होकर जाएंगी।
वासंतिक नवरात्र के साथ साथ ही साथ हिंदू नव वर्ष का आरंभ भी होता है। नवरात्र के साथ कालयुक्त नामक नव संवत्सर का भी आरंभ 30 मार्च को होगा। कालयुक्त नामक नव संवत्सर के राजा एवं मंत्री सूर्यदेव होंगे।
चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन हिन्दू वर्ष का समापन होता है तथा इसी के साथ चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नूतन वर्ष अर्थात नव संवत्सर प्रारम्भ होता है।
इस प्रकार “पिंगल” नामक संवत्सर ( सम्वत् 2081) का समापन चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या 29 मार्च 2025 दिन शनिवार को हो रहा है। तथा इसी के साथ 52वां कालयुक्त” नामक नव संवत्सर आरम्भ हो रहा है।
यद्यपि कि “कालयुक्त” नामक नव संवत्सर का आरम्भ 29 मार्च 2025 दिन शनिवार को सायं 4 बजकर 33 मिनट के बाद ही हो रहा है तथापि सूर्य सिद्धान्त पर आधारित गणना के आधार पर उदया तिथि को ही नव संवत्सर की शुरुआत मानी जाती है।
इसी कारण 30 मार्च 2025 दिन रविवार को भारतीय संस्कृति का सर्वमान्य नववर्ष अर्थात् कालयुक्त नामक नव संवत्सर 2082 की शुरुआत होगी।
वर्ष भर संकल्प आदि में कालयुक्त नामक संवत्सर का प्रयोग किया जाएगा । शास्त्र सम्मत ऐसी मान्यता है कि सृष्टि रचयिता परम पिता ब्रह्मा जी ने चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को ही सृष्टि की रचना की थी ।
अतः इसी को आधार मानकर काल गणना का सिद्धान्त चलता है।
चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को जो दिन या वार पड़ता है। वही उस संवत्सर का राजा होता है तथा सूर्य की मेष संक्रांति जिस दिन होती है उस दिन से संवत्सर के मंत्री पद का निर्धारण होता है।
“कालयुक्त” नामक इस नव संवत्सर में राजा तथा मंत्री का पद ग्रहों में राजा सूर्य को प्राप्त हो रहा है । कालयुक्त नामक यह संवत्सर गर्मी, उग्रता, राजतंत्र के प्रभाव को बढ़ाने वाला होगा।
यह संवत्सर उपद्रव से युक्त एवं नकारात्मक फल प्रदायक होगा, जनता एवं समाज में तीव्रता, आक्रोश बना रहेगा। राजनीतिक दलों सहित समस्त संस्थाओं द्वारा किया गया। कार्य-योजना जनता के हित में होगा, लेकिन आमजन राजनीतिज्ञों से असंतुष्ट भी रहेंगे।
शासन तंत्र अपना कार्य कर पाने में सफल होगें और अधार्मिक क्रियाकलापों में सामान्य वृद्धि होगी। पृथ्वी का तापमान बढ़कर चुनौती उत्पन्न कर सकता है। इस वर्ष अत्यधिक गर्मी से पशु पक्षी पेड़ पौधे अत्यधिक प्रभावित होंगे। भीषण गर्मी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
गर्मी एवं लू प्रभाव से मृत्यु दर में वृद्धि भी हो सकती है। इस वर्ष नकारात्मक प्रभाव वाले व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि होती दिख रही है। वर्षा की मात्रा में कमी हो सकती है साथ ही साथ कहीं-कहीं पर बहुत ज्यादा बारिश के कारण भी नकारात्मक प्रभाव स्थापित हो सकता है।
अचानक कोई नई बीमारी, नया उत्पात, दैवीय आपदाओं में वृद्धि, भूस्खलन, समुद्र में हलचल, सुनामी, चक्रवात, भूकंप, बाढ़ जैसी दुर्घटनाओं में वृद्धि हो सकती है ।
अग्निकांड में तीव्र वृद्धि, विस्फोटक पदार्थ से क्षति में वृद्धि, आतंकवादी दुर्घटनाओं में वृद्धि आयुधों के प्रयोग में वृद्धि सत्ता पर आसीन व्यक्तियों द्वारा आम जनमानस पर नकारात्मक प्रभाव ज्यादा देखा जा सकता है।
आकाशीय परिषद में 10 में से 6 पद पाप ग्रह को प्राप्त होने के कारण भारत में अचानक प्राकृतिक आपदाओं के दुष्प्रभाव देखेगा।
इस वर्ष भीषण गर्मी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, ग्लैशियर का तीव्रता के साथ पिघलना समुद्र के किनारे के शहरों के लिए अत्यधिक खतरा उत्पन्न हो सकता है।
साथ ही ग्राम, नगर, शहर, वन उपवन में आग का भयंकर दुष्प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस संवत्सर में युद्ध या युद्ध जैसी स्थितियां अचानक बढ़ेंगी।
दुष्ट प्रकृति के लोगो का प्रभाव बढ़ेगा। आम जनता सरकार के तौर तरीकों से बहुत ज्यादा दुःखी रहेगी। शेयर बाजार में कुछ सकारात्मकता दिखाई देगा।
बैंको की स्थिति सरकार के गलत नीतियों से खराब होंगी, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सुधार होगा, केंद्रीय सरकार देश हित मे महत्वपूर्ण कार्यों के सर्च साथ अनेकों नियमों कानूनों का निर्माण करेगी परन्तु सरकार कार्यों में शिथिलता बरतेगी। न्यायालय एवं न्यायाधीश का सकारात्मक प्रभाव दिखेगा।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।