होर्मुज में ‘जॉम्बी शिप्स’ का खेल: कागजों पर तो कबाड़, समुद्र में बन रहे शिकार; ईरान की घेराबंदी को चुनौती दे रहे भूतिया जहाज…

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक नया और रहस्यमयी खतरा जॉम्बी शिप्सउभर आया है।

ये ऐसे जहाज हैं जो लंबे समय पहले स्क्रैप हो चुके जहाजों के नाम और पहचान का इस्तेमाल करके इस संकटपूर्ण जलमार्ग से गुजर रहे हैं।

रविवार शाम को ‘नबीन’ नाम का एक जहाज पर्शियन गल्फ में ट्रैक हुआ और सोमवार सुबह ओमान की खाड़ी में पहुंच गया, जिससे लगता है कि यह होर्मुज से सफलतापूर्वक गुजर चुका है।

लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि 2002 में बना यह अफ्रामैक्स टैंकर पांच साल पहले बांग्लादेश के शिपब्रेकिंग यार्ड में भेज दिया गया था।

यानी यह असली ‘नबीन’ नहीं, बल्कि एक जॉम्बी टैंकर है-एक ऐसा जहाज जो मृत जहाज की पहचान चुराकर ‘जिंदा’ हो गया है।

नबीन के सिग्नल से उठे कई सवाल

ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, यह जहाज युद्ध शुरू होने से कुछ घंटे पहले पर्शियन गल्फ में दाखिल हुआ था और इराक के खोर अल जुबैर को अपना गंतव्य बताया था। यह गल्फ में रहा और रविवार को बाहर निकला।

ड्राफ्ट रीडिंग से लगता है कि यह पूरी तरह लदा हुआ था, लेकिन कोई स्पष्ट गंतव्य नहीं दिखा। क्षेत्र में भारी इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेरेंस के कारण जहाजों की सटीक लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो गया है।

दुबई स्थित मुहित मैरीटाइम FZE और सजिटा मैरीटाइम कंपनी लिमिटेड को ‘नबीन’ का मैनेजर और ओनर बताया गया है, लेकिन इनके फोन नहीं लगे और ईमेल बाउंस हो गए।

‘जमाल’ के मामले में मुंबई की रिसर्जेंस शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड मैनेजर थी, लेकिन उसने भी कोई जवाब नहीं दिया।

क्यों होता है डार्क शिपिंग का इस्तेमाल

जॉम्बी शिप्स शैडो शिपिंग में नई बात नहीं हैं। पहले ये प्रतिबंधित तेल व्यापार में इस्तेमाल होती थीं, जहां जहाज अपनी असली पहचान छिपाकर कार्गो ले जाते थे। लेकिन अब सक्रिय युद्ध में होर्मुज से गुजरने के लिए इसका इस्तेमाल एक नया खतरा बन गया है। खासकर ‘जमाल’ का मामला इसलिए अजीब था, क्योंकि LNG कैरियर बहुत स्पेशलाइज्ड और कम संख्या में होते हैं।

वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा रहा

ईरान की रक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तट या द्वीपों पर हमला हुआ तो पर्शियन गल्फ और तटीय इलाकों में सभी एक्सेस रूट्स पर माइंस बिछा दिए जाएंगे। इससे पहले ही मिसाइल, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक डिसरप्शन और नौसैनिक माइंस का खतरा मौजूद है।

IEA के प्रमुख फतिह बिरोल ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने बड़ा खतरा खड़ा है, जो 1970 के दशक के तेल संकट और 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से भी बदतर हो सकता है। ये जॉम्बी शिप्स सिर्फ एक चालाकी नहीं, बल्कि युद्ध में शिपिंग की हताशा और जोखिम की नई परत दिखा रही हैं। होर्मुज खुलने तक यह संकट और गहराता जाएगा।

दो दिन में दूसरा मामला

यह दूसरा ऐसा संदिग्ध मामला है। कुछ दिन पहले शुक्रवार को ‘जमाल’ नाम का एक जहाज होर्मुज पार करता दिखा, जो खुद को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) कैरियर बता रहा था। लेकिन रिकॉर्ड दिखाते हैं कि यह जहाज पिछले साल भारत के एक डेमोलिशन यार्ड में बीच पर लाया गया था।

ब्लूमबर्ग ने इसे भी ‘जॉम्बी शिप’ बताया। इन दोनों मामलों से साफ है कि जहाज मालिक या ऑपरेटर अब कार्गो को युद्धग्रस्त होर्मुज से निकालने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, जहां सामान्य व्यावसायिक यातायात लगभग ठप पड़ चुका है।

सिर्फ ईरान से जुड़े जहाजों को मिल रही छूट

फरवरी के अंत में युद्ध बढ़ने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है। अब तक जो कुछ जहाज गुजरे हैं, वे या तो ईरान से जुड़े हैं या तेहरान की मंजूरी से। कई जहाज ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके ‘डार्क’ हो जाते हैं, ताकि निगरानी से बच सकें।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान को दो दिन का अल्टीमेटम दिया था कि जलडमरूमध्य खोलो, वरना ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला किया जाएगा। ईरान ने जवाब में कहा कि ऐसी स्थिति में वह होर्मुज को पूरी तरह बंद कर देगा।

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