बात तो हुई, लेकिन टॉमहॉक मिसाइल देने में ट्रंप की हिचकिचाहट; जेलेंस्की ने वजह बताई…

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी बैठक के बाद जेलेंस्की ने मीडिया से बात की। टॉमहॉक मिसाइल मिलने की उम्मीद लेकर आए यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि अमेरिका नहीं चाहता कि रूस और यूक्रेन का युद्ध और ज्यादा बढ़े।

इसलिए उन्हें टॉमहॉक मिलने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि इस बैठक के दौरान 1600 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली टॉमहॉक मिसाइल पर चर्चा हुई है, लेकिन इस पर कोई भी घोषणा नहीं होने वाली।

यूक्रेनी सूत्र के आधार पर सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति जेलेंस्की टॉमहॉक मिसाइलों को लेकर काफी ज्यादा उत्साहित थे।

उन्होंने बैठक के दौरान ट्रंप को उन जगहों का नक्शा भी दिखाया, जिन पर वह टॉमहॉक के जरिए हमला करने वाले हैं।

हालांकि, पहले यूक्रेन को लंबी दूरी की यह मिसाइल देने का समर्थन कर रहे ट्रंप ने पुतिन से बातचीत के बाद अपना रुख बदल लिया है।

ट्रंप से बैठक के बाद बाहर आए जेलेंस्की ने मीडिया से बात करते हुए अपने ड्रोन्स सिस्टम की जमकर तारीफ की।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि रूस टॉमहॉक मिसाइलों को लेकर सचमुच डरा हुआ है। क्योंकि यह एक शक्तिशाली हथियार है। वह जानते हैं कि हमारे पास क्या है, हमारे पास किस तरह के हथियार हैं। हम इसका उत्पादन कैसे करते हैं। वह इस पूरी प्रक्रिया को भी समझते हैं।”

जेलेंस्की से जब यह पूछा गया कि क्या वह अमेरिका से टॉमहॉक मिसाइल मिलने को लेकर आशावादी है, तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने तपाक से कहा कि वह इसे लेकर यथार्थवादी हैं।

उन्होंने कहा, “हमने तय किया है कि हम इस बारे में कोई बात नहीं करेंगे। क्योंकि कोई भी नहीं चाहता… मेरा मतलब है कि संयुक्त राज्य अमेरिका नहीं चाहता कि और तनाव बढ़े।”

ट्रंप के साथ अपनी बैठक को खत्म करने के बाद जेलेंस्की ने अपने यूरोपीय साथियों के साथ बात की। इस बातचीत में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर, इटली पीएम मेलोनी के साथ-साथ नाटो से महासचिव और और यूरोपीय साथी मौजूद थे।

गौरतलब है कि ट्रंप के साथ जेलेंस्की की फरवरी में हुई पहली बैठक के खराब अनुभव को देखते हुए अगस्त में यूरोप के ज्यादातर नेता जेलेंस्की के साथ वाइट हाउस आए थे।

आपको बता दें यूक्रेन शुरुआत से ही अमेरिका से मिसाइलों की मांग करता रहा है। हालांकि शुरुआत में बाइडन प्रशासन ने भी अपने हथियारों का इस्तेमाल केवल यूक्रेन की जमीन पर मौजूद रूसी सैनिकों के ऊपर करने का निर्देश दिया था।

बाद में ट्रंप के सत्ता में आने के कुछ समय पहले बाइडन प्रशासन ने यूक्रेन को रूस के अंदर हमला करने की खुली छूट दे दी थी, जिसके बाद रूस को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। 20 जनवरी को सत्ता में आते ही ट्रंप ने यूक्रेन की मदद रोक दी थी।

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