सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारों पर अतिक्रमणों और अवैध निर्माणों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
कहा है कि यदि इन अतिक्रमणों के कारण गंगा के किनारों पर बाढ़ की समस्या पैदा होती है तो उसका भी स्पष्ट उल्लेख किया जाए। यह रिपोर्ट उन सभी राज्यों से मांगी गई है जिनसे होकर गंगा नदी बहती है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार, स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन और उन सभी राज्यों की सरकारों, जहां से होकर गंगा बहती है, से विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
पीठ ने यह रिपोर्ट अशोक कुमार सिन्हा की याचिका पर सुनवाई के दौरान तलब की है। सिन्हा ने पटना में गंगा के किनारों पर अतिक्रमण से पैदा हुई बाढ़ की समस्या पर दायर याचिका को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा खारिज किए जाने के बाद शीर्ष न्यायालय में याचिका दाखिल की है।
याचिकाकर्ता की ओर सुप्रीम कोर्ट में पेश अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने कहा कि पटना में 2023 में दीघा घाट और नौजर घाट के बीच गंगा के किनारे 213 अवैध कब्जे चिह्नित किए गए थे। इनमें से 58 को हटा दिया गया लेकिन 145 अभी भी बने हुए हैं। यह स्थिति तब है जबकि कई न्यायालय उन्हें हटाए जाने के कई आदेश दे चुके हैं।
पीठ ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यह मामला केवल बिहार तक ही सीमित नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत उन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैला हुआ है जहां से होकर गंगा बहती है। इसलिए इस मामले में हमारे समक्ष इन सभी राज्यों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट पेश की जानी चाहिए।
इस रिपोर्ट में अतिक्रमणों की अवधि और उनकी वर्तमान स्थिति का भी उल्लेख होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण बचाव अधिनियम के तहत 2016 में जारी अधिसूचना पर कार्रवाई का भी ब्योरा तलब किया है। इस अधिसूचना में गंगा के आसपास के क्षेत्र के पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाने थे।