सुप्रीम कोर्ट ने कहा: विकास और पर्यावरण पर असर डालने वाली गलतियों में कमी लाएं, न्यायिक निश्चितता सुनिश्चित करें…

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत होने के नाते ऐसी गलतियां कम से कम करने का प्रयास होना चाहिए जिनका देश के विकास एवं वृद्धि या पर्यावरण पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

अदालत को समग्रता से देश पर पड़ने वाले निहितार्थों एवं परिणामों को भी देखना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची एवं जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सचेत किया कि यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि न्यायिक प्रणाली में पूर्वानुमान और निश्चितता का कोई तत्व नहीं है या अदालतें परस्पर विरोधी हैं।

पीठ ने ये टिप्पणियां परियोजनाओं को पूर्व तिथि से पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कीं।

शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष 18 नवंबर को अपना ही फैसला पलटते हुए केंद्र सरकार और अन्य प्राधिकारियों के लिए पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को भारी जुर्माने का भुगतान करने पर पूर्व तिथि से पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया था।

अदालत का कहना था कि ऐसा नहीं करने से हजारों करोड़ रुपये बर्बाद हो जाएंगे।

शीर्ष अदालत ने 2:1 के बहुमत से कहा था कि अगर 16 मई, 2025 का आदेश वापस नहीं लिया गया तो सरकारी कोष से लगभग 20 हजार करोड़ खर्च करके बनाई गईं कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाओं को ढहाना पड़ेगा।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने नवंबर के फैसले की जिक्र करते हुए कहा कि तीन सदस्यीय पीठ ने मामले के गुण-दोष पर कुछ निष्कर्ष दिए थे।

उन्होंने कहा कि मई का फैसला दो सदस्यीय पीठ का था। पीठ ने कहा, ‘किसी भी हितधारक के मन में यह गलत धारणा नहीं बननी चाहिए कि आदेश पारित करने के दौरान अदालत सभी चीजों पर विचार नहीं करती। पुनर्विचार याचिका पर एक फैसला दिया गया है।

पीठ ने विस्तार से मामले पर सुनवाई की और उन्होंने एक दृष्टिकोण अपनाया। हमें उस दृष्टिकोण का भी सम्मान करना चाहिए।’ कुछ वकीलों ने इस मामले में दायर अंतरिम अर्जियों का भी जिक्र किया।

इस पर अदालत ने कहा कि वह इन अर्जियों समेत मामले पर सोमवार को सुनवाई करेगी।

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