विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट के जरिये भारतीय ध्वज वाले जहाजों के आने-जाने के लिए कोई ” ब्लैंकेट अरेंजमेंट” यानी व्यापक व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि हर जहाज का मूवमेंट एक अलग घटना है।
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में जयशंकर ने बताया कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच बातचीत के परिणामस्वरूप दो भारतीय ध्वज वाले टैंकर शिवालिक और नंदा देवी इस महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग से गुजरे हैं। यह दोनों टैंकर लगभग 92,712 टन एलपीजी ला रहे हैं।
उन्होंने ब्रसेल्स में कहा- ”मैं इस समय उनसे बातचीत कर रहा हूं और मेरी बातचीत के कुछ नतीजे भी निकले हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बातचीत अभी भी जारी है।
रॉयटर के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि ईरान के साथ प्रत्यक्ष वार्ता होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से शिपिंग को फिर से शुरू करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग यानी होर्मुज स्ट्रेट को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है।
वैश्विक तेल और एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया क्षेत्र भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्त्रोत रहा है।
जयशंकर ने यह भी खंडन किया कि भारत ने जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति देने के लिए ईरान को कुछ दिया है।
उन्होंने कहा, ”यह एक एक्सचेंज का मुद्दा नहीं है।” उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच एक संबंध है। पश्चिम एशिया में चल रही जंग दुर्भाग्यपूर्ण है।