परमाणु हथियारों पर अड़े रुख, भरोसे की कमी और… इन 5 कारणों से नहीं बन पाया ईरान-अमेरिका समझौता…

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच 21 घंटे तक चली शांति वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई। दशकों में हुई इस उच्चतम स्तर की कूटनीतिक कोशिश के बावजूद दोनों पक्ष गहरे मतभेदों को दूर करने में विफल रहे। हालांकि, दोनों पक्षों ने भविष्य में बातचीत जारी रखने के संकेत दिए हैं।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता के दौरान ऐसा क्या हुआ है, जिसके कारण बातचीत विफल हो गई। आइए जानते हैं ईरान-अमेरिका के बीच विफल हुए शांति वार्ता के उन पांच प्रमुख कारणों के बारे में, जिसने मिडिल ईस्ट की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

1. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद

इस्लामाबाद में हो रही शांति वार्ता में अमेरिका की मांग थी कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित नहीं करेगा, इस संबंध में ठोस गारंटी दी जाए। अमेरिका ने संवर्धन और संबंधित उपकरणों पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात कही, जबकि तेहरान ने इसे अपने संप्रभु अधिकारों पर अत्यधिक प्रतिबंध मानते हुए इसका विरोध किया और अमेरिका के इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया।

2. जब्त संपत्तियों पर विवाद

ईरान ने किसी भी समझौते के हिस्से के रूप में कतर और अन्य देशों में मौजूद निधियों सहित विदेशों में रखी जब्त संपत्तियों की मांग की है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसी शर्तों पर सहमत होने से इनकार कर दिया, जिससे आर्थिक रियायतों पर अपेक्षाओं में स्पष्ट अंतर उजागर हुआ।

3. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव

इस्लामाबाद में चली बातचीत के दौरान होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का मुद्द प्रमुख विवाद बनकर उभरा, जिस पर ईरान ने पारगमन शुल्क वसूलने की क्षमता सहित अधिक अधिकार की मांग की। जबकि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रोक-टोक वैश्विक माल ढुलाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

4. ईरान की व्यापक मांग

ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति और लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में पूर्ण युद्धविराम की मांग करके वार्ता का दायरा बढ़ाया। जबकि अमेरिका परमाणु प्रतिबंधों और समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित रहा, जिससे दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता में असंगति उत्पन्न हुई।

5. विश्वास की कमी

पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता के दौरान तनाव में उतार-चढ़ाव और आपसी अविश्वास की कमी देखने को मिली। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अड़ियलपन का आरोप लगाया, जिससे विवाद और अधिक बढ़ गया। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच अभी भी काफी मतभेद हैं और युद्धविराम की स्थिति नाजुक है।

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