सोशल मीडिया पर कड़ी कार्रवाई: भीलवाड़ा, राजस्थान में अफवाह फैलाने के आरोप में 10 इन्फ्लुएंसर्स को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने बाद में सार्वजनिक रूप से माफी मां…

राजस्थान के भीलवाड़ा में डीजल, पेट्रोल एवं रसोई गैस की किल्लत की अफवाह फैलाने के मामले में 10 इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करने के साथ ही इनके माफी मंगने से संबंधित वीडियो को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करवाया है। साथ ही अफवाह फैलाने वाले वीडियो डिलीट करवाए हैं।

भीलवाड़ा के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि ईरान और इजरायल-अमेरिका में हो रहे युद्ध के बीच गैस, डीजल एवं पेट्रोल की किल्लत को लेकर 10 लोगों ने इंटरनेट मीडिया पर अफवाह फैलाई थी।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों में राधेश्याम जाट, मुकेश प्रजापत, कैलाश बैरवा, अर्पित, करण जाट, अर्जुन चौधरी, महेंद्र बैरवा, कैलाश बैरवा, ओमप्रकाश एवं दीपक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि जिले के सभी पुलिस थानाधिकारियों के साथ ही साइबर थाना पुलिस को भी इस तरह की अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखने के लिए कहा गया है।

सिलिकोसिस पीड़ित होने का फर्जी प्रमाण-पत्र बनाने वाले गिरोह का राजफाश

राजस्थान में सिलिकोसिस पीडि़त होना का फर्जी प्रमाण-पत्र देने वाले गिराह का राजफाश हुआ है। गिरोह में चिकित्सक, रेडियोग्राफर एवं दलाल शामिल हैं। दलाल पैसे देकर चिकित्सकों एवं रेडियोग्राफरों से लोगों के फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाते हैं।

इस मामले में पुलिस ने दौसा जिले में दो चिकित्सकों एवं एक रेडियोग्राफर को गिरफ्तार करने के साथ ही राज्यभर के 10 चिकित्सकों एवं 12 रेडियोग्राफरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।

दौसा साइबर पुलिस थानाधिकारी बृजेश ने बताया कि डॉ. मनोज ऊंचवाल, डा. डीएन शर्मा एवं रेडियोग्राफर मनोहरलाल को गिरफ्तार किया गया है। तीनों ने कुल 413 फर्जी प्रमाण-पत्र जारी कर राज्य सरकार को 12.39 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।

पीड़ितों को इस तरह से फंसाया जाता था

दरअसल, सिलिकोसिस पीड़ित मरीज को राज्य सरकार 1500 रुपये मासिक पेंशन देने के साथ ही तीन लाख रुपये आर्थिक सहायता के रूप में देती है।

पीड़ित की मौत पर उसके स्वजन को दो लाख रुपये की सहायता दी जाती है। पीड़ित के अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये की मदद सरकारी कोष से दी जाती है।

यही वजह है कि लोग फर्जीवाड़ा कर प्रमाण-पत्र हासिल कर लेते हैं और सरकार की नीतियों का लाभ उठाते हैं। ऐसे में फर्जीवाड़े की सूचना पर चिकित्सा एवं पुलिस विभाग ने जांच शुरू की तो पता चला कि अकेले दौसा जिले में ही 10 माह में 2,453 फर्जी कार्ड बनाए गए।

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