राजस्थान हाई कोर्ट ने खाप पंचायतों द्वारा सुनाए जाने वाले फैसलों जैसे सामाजिक बहिष्कार और जुर्माने की कुप्रथा को असंवैधानिक करार देते हुए राज्य सरकार को महाराष्ट्र की तर्ज पर कानून बनाने का सुझाव दिया है।
बता दें कि महाराष्ट्र में सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम-2016 लागू है। हाई कोर्ट के न्यायाधीश फरजंद अली ने 11 अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी का हुक्का-पानी बंद करना या उसे समाज से बहिष्कृत करना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है।
न्यायालय ने इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे मामलों की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी की नियुक्ति करें।
साथ ही सामाजिक बहिष्कार से जुड़े लंबित मामलों की तीन माह में निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। खाप पंचायतों के फरमान से जुड़े कई बड़े मामले पिछले दिनों सामने आए थे।
इनमें सिरोही जिले में दलित परिवार द्वारा बेटे की शादी में बैंड-बाजे और घोड़ी के उपयोग पर उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। पिछले सप्ताह बालोतरा में मृत्यु भोज के खिलाफ अभियान चला रहे एक व्यक्ति पर खाप पंचायत ने पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
वहीं एक सरपंच को पंचायत में हाथ जोड़कर एक पैर पर खड़ा होने को मजबूर किया गया था। इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।