महाराष्ट्र के चर्चित मालेगांव ब्लास्ट 2008 केस में पहले फंसे फिर बरी हुए कर्नल श्रीकांत पुरोहित को प्रमोशन मिल गया है। भारतीय सेना ने उन्हें ब्रिगेडियर पद पर पदोन्नति के लिए मंजूरी दे दी है। इस बात की जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी है।
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने कर्नल पुरोहित की पदोन्नति की याचिका पर सुनवाई के बाद, 31 मार्च 2026 को होने वाली उनकी सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी थी। कर्नल पुरोहित ने ट्रिब्यूनल से कर्नल और ब्रिगेडियर के पद पर प्रमोशन की मांग की थी।
उन्होंने दलील दी थी कि मालेगांव धमाका मामले में उनकी गिरफ्तारी और लंबे समय तक चले मुकदमे के कारण उनके करियर की प्रगति रुक गई थी।
एनआईए की विशेष अदालत ने 2025 में किया था बरी
उन्हें 2008 में गिरफ्तार किया गया था और वे 2017 तक हिरासत में रहे, जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी। इसके बाद उन्होंने अपनी ड्यूटी फिर से शुरू कर दी और तब से वे सेवा में हैं। मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने 31 जुलाई, 2025 को मालेगांव धमाका मामले में इस अधिकारी को बरी कर दिया।
वहीं, 16 मार्च को पारित एक आदेश में जस्टिस राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी की कि संबंधित अधिकारी ने प्रथम दृष्टया यह मामला बनाया है कि पदोन्नति और सेवा-लाभों के मामले में उसके साथ उसके कनिष्ठों के समान ही व्यवहार किया जाना चाहिए।
कर्नल पुरोहित के वकील ने कोर्ट में ये दलील दी
ट्रिब्यूनल ने भारत संघ और अन्य प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किया था, जिसमें उनसे यह बताने को कहा गया कि अधिकारी द्वारा मांगी गई राहत क्यों न दी जाए।
सुनवाई के दौरान उनके वकील मेजर एस.एस. पांडे (सेवानिवृत्त) ने यह तर्क दिया कि दो दशकों से अधिक के बेदाग सेवा रिकॉर्ड और ड्यूटी पर दोबारा लौटने के बाद भी बेहतरीन प्रदर्शन रिपोर्टों के बावजूद पदोन्नति के लिए उनके मामले पर विचार नहीं किया गया।
बरी होने और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि उनकी सेवानिवृत्ति को तब तक स्थगित रखा जाए, जब तक कि पदोन्नति और सेवा लाभों से संबंधित उनकी वैधानिक शिकायत पर कोई निर्णय नहीं ले लिया जाता।