प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार):
आज महाशिवरात्रि है। इस साल अर्धरात्रि में चतुर्दशी तिथि मिल रही है। इस साल की महाशिवरात्रि अत्यन्त शुभ है।
महाशिवरात्रि पर फाल्गुन कृष्ण पक्ष, त्रयोदशी व चतुर्दशी का संयोग है।
शिव महापुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव का माता पार्वती के साथ विवाह हुआ था। शिवरात्रि का अर्थ होता है शिव की रात। शिव महापुराण के अनुसार, शिवरात्रि व्रत रखने से भगवान शिव भक्तों पर प्रसन्न होते हैं, उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त होता है।
इस व्रत को कुंवारी कन्याएं अच्छे वर प्राप्ति के लिए करती हैं, तो महिलाएं पति एवं परिवार के दीर्घायु के लिए। जानें पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त व विधि-
महाशिवरात्रि पर शाम 6:19 से शुरू होगी शिव पूजा, नोट करें सुबह से रात तक पूजा के शुभ मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
- विजय मुहूर्त 14:29 पी एम से 15:15 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त 18:17 पी एम से 18:42 पी एम
- अमृत काल 07:28 एएम से 09:00 एएम
- लाभ – उन्नति 06:49 एएम से 08:15 एएम
- अमृत – सर्वोत्तम 08:15 एएम से 09:42 एएम
- शुभ – उत्तम 11:08 एएम से 12:34 पी एम
- चर – सामान्य 15:27 पी एम से 16:53 पी एम
- लाभ – उन्नति 16:53 पी एम से 18:19 पी एम
- शुभ – उत्तम 19:53 पी एम से 21:26 पी एम
- अमृत – सर्वोत्तम 21:26 पी एम से 23:00 पी एम
- चर – सामान्य 23:00 पी एम से 00:34 ए एम, फरवरी 27
- लाभ – उन्नति 03:41 से 05:15, फरवरी 27
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – फरवरी 26, 2025 को सुबह 11:08
चतुर्दशी तिथि समाप्त – फरवरी 27, 2025 को सुबह 08:54 बजे
27 फरवरी को, व्रत पारण समय – सुबह 06:48 से 08:54
5 पहर पूजा मुहूर्त (पंचांग अनुसार)
- पहला प्रहर- शाम 06:19 से 09:26 बजे
- दूसरा प्रहर- 09:26 से 12:34, फरवरी 27
- तीसरा प्रहर- 00:34 से 03:41, फरवरी 27
- चौथा प्रहर- 03:41 से 06:48, फरवरी 27
- निशिता काल- 00:09 ए एम से 00:59 ए एम, फरवरी 27
- पूजा-विधि: महाशिवरात्रि पर सुबह उठकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। गंगा समेत अन्य नदियों में या घर पर पवित्र स्नान के बाद शिवलिंग या भगवान शंकर की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं और केसरयुक्त जल से बाबा का अभिषेक करें तथा अखंड दीपक जलाना चाहिए। शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाने के साथ ही बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र चढ़ाना चाहिए और केसरयुक्त खीर से बाबा का भोग लगाएं। शिव जी की आरती करें। ॐ नमः शिवाय का मंत्र-जाप करें। अंत में क्षमा प्रार्थना भी करें।
- डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।