प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
भगवान शिव को पूजने, मनाने और उनकी कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय सावन मास 11 जुलाई से शुरू होगा। धन, वैभव, सुख व संपन्नता के कारक ग्रह शुक्र अपनी राशि वृष में सावन की शुरुआत में विद्यमान रहेंगे।
उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक व ज्योतिर्विद पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि पहले ही दिन शुक्र ग्रह अपनी राशि में होने की वजह से मालव्य नामक पंच महापुरुष राजयोग का निर्माण करेंगे। मास की पूर्णिमा पर नौ अगस्त को सावन का समापन होगा।
इस बार सावन मास में चार सोमवार रहेगा, पहला सोमवार 14 जुलाई, दूसरा 21 जुलाई, तीसरा 28 जुलाई और चौथा व अंतिम सोमवार चार अगस्त को पड़ रहा है।
निदेशक ने बताया कि यह महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष रूप से फलदायक माना जाता है। शिवलिंग पर भस्म, बिल्व पत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, चंदन, फल-फूल अर्पित करना चाहिए।
भगवान शिव को चंदन का लेप और माता पार्वती को शृंगार का सामान अर्पित किया जाना फलदायक सिद्ध होगा।
मास पर्यंत भगवान शिव को जलाभिषेक, रुद्राभिषेक व महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का उत्तम समय होता है। रुद्राभिषेक के वक्त पुरुषों का धोती व महिलाओं का साड़ी या सूट पहनना अनिवार्य है।
रुद्राभिषेक के विभिन्न लाभ
भवन-वाहन के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें।
धन वृद्धि के लिए शहद व घी से अभिषेक करें।
ज्वर की शांति के लिए शीतल जल व गंगाजल से अभिषेक।
इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।
तीर्थ के जल से अभिषेक करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।