चुनाव में कुत्तों से छुटकारा दिलाने का वादा निभाने के लिए सरपंच ने 300 कुत्ते मारे, FIR दर्ज…

तेलंगाना में पंचायत चुनाव के दौरान किया गया एक वादा अब राज्य के लिए शर्मनाक और चौंकाने वाली हकीकत बन गया है।

जगतियाल जिले के पेगडापल्ली गांव में आरोप है कि सरपंच ने गांव को आवारा कुत्तों से निजात दिलाने के चुनावी वादे को निभाने के लिए 22 जनवरी को करीब 300 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर जहरीले इंजेक्शन देकर मरवा दिया।

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस ताजा घटना के साथ ही जनवरी महीने में तेलंगाना के विभिन्न गांवों में मारे गए आवारा कुत्तों की संख्या करीब 900 तक पहुंच चुकी है।

इस कथित सामूहिक हत्या ने राज्य में पशु क्रूरता के मामलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुत्तों को मारने के लिए की गई नियुक्ति

मामले में दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में एफआइआर दर्ज की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आवारा कुत्तों को मारने के लिए कुछ लोगों को कथित तौर पर नियुक्त किया गया था।

पुलिस निरीक्षक किरण के अनुसार, जांच के दौरान दफन स्थल से अब तक 70 से 80 कुत्तों के शव निकाले जा चुके हैं, जो तीन से चार दिन पुराने बताए जा रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आरोपितों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की जा सकती और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ होगी। जांच जारी है।

कानून, करुणा और संवेदनशीलता तीनों को कुचल दिया गया

गौरतलब है कि यह मामला अकेला नहीं है। जनवरी में ही याचरम गांव में करीब 100 कुत्तों को जहर दिए जाने का आरोप सामने आया, जबकि हनमकोंडा जिले में लगभग 300 आवारा कुत्तों की कथित हत्या के मामले में दो महिला सरपंचों समेत नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

कामारेड्डी जिले में भी करीब 200 कुत्तों की मौत के मामले में पांच सरपंचों समेत छह लोगों को नामजद किया गया है।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या स्थानीय राजनीति में चुनावी वादों की पूर्ति के नाम पर कानून, करुणा और संवेदनशीलता तीनों को कुचल दिया गया है।

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