प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को भगवान शिव का साक्षात वरदान माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति महादेव के आंसुओं से हुई है।
इसलिए इसे धारण करने वाले पर शिव की विशेष कृपा रहती है। ज्योतिष शास्त्र में अलग-अलग मुखी रुद्राक्षों का संबंध अलग-अलग ग्रहों और देवताओं से बताया गया है।
अगर आप जीवन में संघर्ष, ग्रहों के दोष या मानसिक अशांति से जूझ रहे हैं, तो 10 से 14 मुखी रुद्राक्ष आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं हैं।
किस रुद्राक्ष से क्या होगा लाभ?
10 मुखी रुद्राक्ष: यह भगवान विष्णु का स्वरूप है। अगर आपको लगता है कि आपकी तरक्की को किसी की नजर लग गई है या आप अदालती मामलों में फंसे हैं, तो यह रुद्राक्ष सुरक्षा कवच का काम करता है। इसे धारण करने से नकारात्मक शक्तियां (Negative Energy) दूर रहती हैं।
11 मुखी रुद्राक्ष: इसे साक्षात हनुमान जी (Hanuman Ji) का रूप माना जाता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनमें आत्मविश्वास की कमी है। इसे पहनने से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और इंसान निडर बनता है।
12 मुखी रुद्राक्ष: अगर आप समाज में मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा चाहते हैं, तो 12 मुखी रुद्राक्ष धारण करें। इसका स्वामी सूर्य देव (Surya Dev) को माना गया है, जो व्यक्ति के चेहरे पर तेज और स्वभाव में नेतृत्व के गुण लाता है।
13 मुखी रुद्राक्ष: इसे इंद्र देव और कामदेव का आशीर्वाद प्राप्त है। यह वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करता है और व्यक्ति के व्यक्तित्व में आकर्षण पैदा करता है।
14 मुखी रुद्राक्ष: इसे सबसे शक्तिशाली माना जाता है क्योंकि यह शनि और मंगल दोनों के दोषों को शांत करता है। अगर आप शनि की साढ़ेसाती या मंगल दोष से परेशान हैं, तो यह आपके जीवन की बाधाओं को जड़ से खत्म करने की शक्ति रखता है।
क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?
रुद्राक्ष की महिमा का सबसे प्रामाणिक वर्णन ‘शिव पुराण’ (Shiv Puran) की विद्येश्वर संहिता में मिलता है। इसके अलावा ‘पद्म पुराण’ और ‘स्कंद पुराण’ में भी विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार रुद्राक्ष धारण करने से पापों का नाश होता है। साथ ही, सेहत और सुख-समृद्धि में भी वृद्धि होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रुद्राक्ष शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करता है।