ओडिशा में वर्ष 2027 में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। पंचायती राज विभाग ने सीट आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी जिला कलेक्टरों को अप्रैल 2026 तक ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर आरक्षण तय करने के निर्देश दिए हैं।
आरक्षण प्रक्रिया शुरू होते ही संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय नेताओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। सबसे अधिक चिंता इस बात को लेकर है कि किन क्षेत्रों को महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया जाएगा और इसका लाभ किसे मिलेगा।
विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, वार्ड सदस्य, सरपंच और समिति सदस्य के लिए जारी प्रारूप अधिसूचना पर 17 अप्रैल तक आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। 24 अप्रैल तक सुनवाई पूरी कर 29 अप्रैल तक अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी।
वहीं, जिला परिषद सीटों के लिए 17 अप्रैल तक आपत्तियां ली जाएंगी, 27 अप्रैल तक सुनवाई होगी और 30 अप्रैल तक अंतिम सूची तय कर दी जाएगी।
चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी
पंचायत चुनाव को देखते हुए प्रदेश की तीनों प्रमुख पार्टियां सक्रिय हो गई हैं। बीजू जनता दल ‘बीजू जयंती’ के जरिए संगठन विस्तार पर जोर दे रही है। पार्टी प्रमुख नवीन पटनायक के जिला दौरे की भी योजना बनाई गई है।
बीजेडी नेता संजय दास वर्मा ने कहा कि पार्टी हर चुनाव के लिए तैयार है और पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी।
वहीं कांग्रेस भी संगठन को मजबूत करने में जुटी है।
प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि पंचायत स्तर पर बैठकों के जरिए संगठन को मजबूती दी जा रही है और इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
दूसरी ओर भाजपा ने ‘गांव चलो’ अभियान के जरिए जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। पार्टी डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों को गांव-गांव तक पहुंचाने में जुटी है।
बदलते समीकरण से मुकाबला होगा दिलचस्प
2024 के आम चुनावों के बाद कई पंचायत प्रतिनिधियों का सत्ताधारी दल की ओर झुकाव देखा गया है, जिससे विपक्ष के लिए चुनौती बढ़ सकती है। ऐसे में जैसे-जैसे आरक्षण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे राजनीतिक समीकरण भी बदलते जाएंगे।
कुल मिलाकर, आरक्षण की कवायद के साथ ही ओडिशा में पंचायत चुनाव 2027 की जमीन तैयार हो रही है और मुकाबला इस बार काफी रोचक होने के आसार हैं।