केरल के कोच्चि में एक एग्री-टेक स्टार्टअप ने पारंपरिक खेती का स्वरूप बदलते हुए ‘रेंट-ए-ट्री’ मॉडल पेश किया है। इस अनूठी पहल के जरिए अब कोई भी व्यक्ति बिना खेती किए आम का पेड़ किराए पर ले सकता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से ग्राहक अपनी पसंद का पेड़ चुनते हैं और उसकी पूरी पैदावार के मालिक बन जाते हैं। अभी यह कंपनी तीन राज्यों में विस्तृत फार्म्स का संचालन कर रही है।
इसके तहत 10,300 के शुरुआती निवेश से ग्राहक सीजन में 90 किलो तक कुदरती तौर पर पके अल्फांसो आम ले सकते हैं। यानी 114.4 रुपए प्रति किलो।
दूसरी तरफ बाजार में अल्फांसो 600-1,500 रुपए प्रति किलो मिलते हैं। फार्म के प्रबंधन से लेकर फसल की तुड़ाई और होम-डिलीवरी तक की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होती है।
टेक्नोलॉजी और परंपरा का तालमेल
यह बिजनेस मॉडल आधुनिक तकनीक और पारंपरिक खेती का बेहतरीन तालमेल है। इसमें ग्राहकों को केवल ऑनलाइन ट्री-सिलेक्शन करना होता है।
रखरखाव का सारा जिम्मा विशेषज्ञ संभालते हैं। इस (डी2सी) डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर मॉडल से बिचौलियों की कतार खत्म हो गई है।
इससे किसानों को बेहतर कीमत और ग्राहकों को शुद्धता की गारंटी मिल रही है। जानकारों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में ऐसे प्रयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने में गेम चेंजर साबित होंगे।
डिजिटल फार्मिंग से बढ़ेगी किसानों की आय
खेती के इस नए तरीके से किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले एक दशक में कृषि क्षेत्र में संस्थागत निवेश और बढ़ेगा। इससे ‘डिजिटल लैंड ओनरशिप’ जैसे कॉन्सेप्ट को मजबूती मिलेगी।
यदि यह मॉडल सफल होता है, तो किसान सीमित भूमि के अधिकतम इस्तेमाल से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकेंगे। खेती का यह आधुनिक तरीका न सिर्फ किसानों की वित्तीय स्थिति सुधारेगा, बल्कि शहरी आबादी को भी शुद्ध खेती से जोड़ेगा।