‘प्रगति में समय लगता है, मेहनत अनिवार्य है’—CJI सूर्यकांत ने कार्यक्रम में रखी अपनी बात…

 प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को पहली पीढ़ी के वकीलों को कड़ी मेहनत और धैर्य के माध्यम से विश्वसनीयता बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।

सीजेआइ सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित डब्ल्यूई (कानून में महिला सशक्तीकरण) शक्ति, संघर्ष और सफलता विषय पर एक परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।

सीजेआइ ने कहा कि शुरुआत में जब मैंने इस पेशे को अपनाया, तो पूरी तरह से अनिश्चितता का माहौल था। परिवार में पहली पीढ़ी का वकील होने के नाते, मेरा मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था। यह व्यवस्था भी मेरे लिए पूरी तरह से नई थी।

लेकिन जब मैं वकालत पढ़ रहा था, तब मैं एक बहुत ही उत्साही छात्र था तथा इस व्यवस्था और इसके संचालन के तरीके को जानने के लिए मेरे मन में बहुत उत्सुकता थी। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा यकीन था कि तरक्की करने में समय लगता है।

‘हिंदी न आने से अलग नहीं पड़ना चाहते दक्षिण भारतीय’

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने बुधवार को कहा कि दक्षिण भारतीय लोग हिंदी नहीं जानने की वजह से अलग-थलग नहीं पड़ना चाहते हैं। उन्होंने न्यायपालिका में हिंदी के इस्तेमाल से जुड़े एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणी को राजनीतिक संदर्भ में नहीं लिया जाना चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि भारत एक उपमहाद्वीप है और कोई भी अपनी भाषा के मामले में बहुत विशिष्ट नहीं हो सकता है।

उन्होंने कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में बहुत सारी भाषाएं शामिल हैं और दक्षिण भारत में कम-से-कम छह भाषाएं हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *