कर्ज में डूबे मुनचुन केवट ने ससुराल पक्ष से मदद नहीं मिलने और लेनदारों के फोन से परेशान होकर पत्नी की हत्या की साजिश पहले ही रच ली थी।
इसके लिए वह कटहल काटने वाला चाकू वारदात के दो दिन पहले ही खरीदकर लाया था।
घटना वाले दिन पत्नी का गला काटते समय बड़ी बेटी की आंख खुल गई और वह रोने लगी। इसके बाद उसने राजफाश होने के डर से बड़ी बेटी सहित तीनों मासूमों को मार डाला।
वारदात में प्रयुक्त चाकू को उसने स्टेशन जाते समय रास्ते में फेंक दिया था।
बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त हरेश्वर वी स्वामी ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद हत्यारोपित मुनचुन ने पुलिस को बताया कि उसने पैतृक गांव पटना के मोकिमपुर निवासी मिथलेश से करीब तीन लाख रुपये कर्ज लिया था।
इसके अलावा अन्य लोगों से करीब दस लाख रुपये लिए थे। कुल 13 लाख रुपये कर्ज लेकर वह ऑनलाइन सट्टे में हार चुका था।
बीते कुछ दिनों से मिथलेश उसकी पत्नी अनीता को कॉल कर रुपये लौटाने का दबाव बना रहा था। उसने 23 फरवरी को मुनचुन को काल कर कहा कि अगर वह रुपये नहीं लौटा सकता है तो पत्नी और बेटियों को उनके हवाले कर दे।
अनीता उसके साथ रहेगी, जबकि बेटियों से वह काम कराएगा। इस पर उसी दिन उसने पत्नी की हत्या करने की साजिश रच डाली और आजादपुर मंडी से 90 रुपये में कटहल काटने वाला चाकू खरीदकर घर ले जाकर छिपा दिया।
पुलिस जांच में पता चला कि मंगलवार दोपहर वह आजादपुर मंडी से घर आ गया था। शाम को होली की खरीदारी की। फिर रात में सभी के सोने का इंतजार करने लगा।
इसके बाद सोते समय उसने पत्नी का गला काट दिया, लेकिन उसी समय बड़ी बेटी जाग गई और रोने लगी। इस पर उसने तीनों बेटियों का भी गला काट दिया।
इसके बाद बुधवार तड़के ई-रिक्शा से जीटी करनाल हाईवे तक पहुंचा। फिर वहां से ऑटो से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचकर शताब्दी ट्रेन से बिना टिकट किशनगढ़ मंडी पहुंच गया। जहां छिपकर रह रहा था।
समयपुर बादली पुलिस ने आरोपित को यहीं से शनिवार को गिरफ्तार कर लिया।
आत्महत्या करना चाहता था मुनचुन
आरोपित मुनचुन ने पूछताछ के दौरान बताया कि पत्नी और तीन बेटियों की हत्या के बाद उसने आत्महत्या का मन बनाया था। इसी लिए वह बादली रेलवे स्टेशन गया था, ताकि ट्रेन के सामने आकर जान दे सके।
लेकिन, स्टेशन पर पहुंचने के बाद मन बदल गया और शताब्दी ट्रेन से किशनगढ़ स्थित सब्जी मंडी पहुंच गया। जहां उसने छह वर्ष पूर्व काम किया था।
800 सीसीटीवी कैमरे खंगाल कर 72 घंटे में पुलिस ने दबोचा
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल सीपी कानून व व्यस्था रविंद्र सिंह यादव, पुलिस उपायुक्त हरेश्वर वी स्वामी, समयपुर बादली एसएचओ शैलेंद्र सिंह जाखड़, एंटी-नारकोटिक्स सेल इंस्पेक्टर गौरव चौधरी, एएटीएस इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार और स्पेशल स्टाफ इंस्पेक्टर आनंद कुमार झा के नेतृत्व में एक बड़ी टेक्निकल जांच शामिल थी, जिसमें 800 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों का एनालिसिस और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) टेक्नोलाजी का इस्तेमाल शामिल था।
टीम को एक साथ बिहार, तमिलनाडु और राजस्थान भेजा गया। आरोपित के भागने के रास्ते को दिल्ली के ट्रांसपोर्ट हब से अजमेर के पास एक छोटे से शहर तक ट्रैक कर पकड़ा गया।