भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और विश्वासघात समेत कई आरोपों का सामना कर रहे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को आज पहली बार गवाही के लिए कोर्ट आना पड़ा।
उनके खिलाफ 2019 में भ्रष्टाचार के तीन अलग-अलग मामले दर्ज हैं। इस मामले में 2020 में मुकदमा शुरू हुआ, लेकिन 4 साल बाद नेतन्याहू गवाही देने कोर्ट के सामने पेश हुए।
इजरायल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है, जब किसी पीएम को कोर्ट के सामने खड़ा होना पड़ा। इजरायली प्रधानमंत्री के खिलाफ अगर भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो जाते हैं तो उन्हें 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
नेतन्याहू पर लगे आरोप इसलिए भी उनके लिए चिंता की बात हैं क्योंकि इजरायली सेना इस वक्त गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह आतंकियों के खिलाफ युद्ध लड़ रही है और नेतन्याहू युद्ध प्रबंधन में व्यस्त हैं।
मंगलवार को नेतन्याहू पहली बार कोर्ट में पेश हुए। उनके खिलाफ मुकदमा मई 2020 में शुरू हुआ था। हालांकि कई बार विभिन्न कारणों से देरी के कारण सुनवाई 10 दिसंबर को रखी गई थी।
नेतन्याहू की टीम ने एक बार फिर मुकदमे में देरी के लिए अदालत से इजाजत मांगी थी, जिसे जज ने खारिज कर दिया था। नेतन्याहू की टीम ने दलील दी थी गाजा और लेबनान में युद्ध के कारण नेतन्याहू मुकदमे की तैयारी नहीं कर पाए।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने खुद पर लगे भ्रष्टाचार, विश्वासघात समेत विभिन्न आरोपों में किसी भी गलत काम से इनकार किया है और दावा किया कि उन्हें पद से हटाने के लिए प्रतिद्वंद्वियों और मीडिया द्वारा राजनीतिक रूप से सुनियोजित अभियान चलाया गया है।
नेतन्याहू पर लगे आरोप कितने गंभीर हैं और अगर वे साबित हो जाते हैं तो उन्हें 10 साल तक की जेल हो सकती है। उन पर लगे आरोपों के बारे में डिटेल से जान लेते हैं।
पहला केस- गिफ्ट घोटाला
इस केस को नेतन्याहू के गिफ्ट घोटाला के रूप में भी जाना जाता है। इस मामले में प्रधानमंत्री पर धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया गया है।
आरोप है कि नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा को राजनीतिक लाभ के बदले में दो धनी व्यापारियों से भारी उपहार मिले। ये व्यवसायी इजरायली हॉलीवुड फिल्म निर्माता अर्नोन मिलचन और ऑस्ट्रेलियाई अरबपति जेम्स पैकर हैं।
कथित तौर पर उपहारों में शैंपेन और सिगार शामिल हैं। मिलचन ने गवाही में भी कबूला है कि उन्होंने जून 2020 में नेतन्याहू को गिफ्ट दिए थे।
नेतन्याहू पर अमेरिकी सरकार के अधिकारियों से बात करके मिलचन को अमेरिकी वीज़ा दिलाने में मदद करके उनके हितों को आगे बढ़ाने का आरोप है।
उन पर कर छूट कानून को आगे बढ़ाने का भी आरोप है, जिससे मिलचन को लाभ हो सकता था। इस तरह की धोखाधड़ी और विश्वासघात के लिए नेतन्याहू को तीन वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है, जबकि रिश्वतखोरी के आरोप में 10 वर्ष तक की जेल और या जुर्माना दोनों हो सकता है।
केस नंबर दो- मीडिया कवरेज के लिए सौदेबाजी
इस मुकदमे के तहत नेतन्याहू ने इजरायली दैनिक अखबार येदिओथ अहरोनोथ के नियंत्रक शेयरधारक व्यवसायी एरॉन मोजेस के साथ अपने हित में मीडिया कवरेज के लिए सौदा किया था, जिसके बदले में उन्होंने उस अखबार के प्रतिद्वंद्वी इजरायल हायोम अखबार के खिलाफ एक सख्त कानून बनाया।
इस मामले में उन पर धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया गया है। इस सौदेबाजी के लिए नेतन्याहू ने 2008 और 2014 के बीच एरॉन के साथ तीन बैठकें कीं।
केस नंबर तीन
इस मामले में नेतन्याहू पर इजरायली दूरसंचार कंपनी बेजेक को विनियामक लाभ देने का आरोप है। जिसके बदले में कंपनी के पूर्व अध्यक्ष द्वारा एक समाचार वेबसाइट पर उनके और उनकी पत्नी के बारे में सकारात्मक कवरेज की गई थी।
नेतन्याहू ने उस समय संचार मंत्री के रूप में, बेजेक के मालिक शॉल एलोविच को कथित रूप से लाभ पहुंचाया और अपने और अपनी पत्नी के लिए जमकर प्रचार कवरेज करवाया।
इस मामले में नेतन्याहू पर धोखाधड़ी और विश्वासघात के अलावा रिश्वतखोरी का भी आरोप है।