संसद की लोक लेखा समिति ने पाया है कि भुवनेश्वर के मंचेश्वर स्थित कैरिज रिपेयर वर्कशाप ने रेलवे कोचों के जरूरी पुर्जों को बदलने के लिए पुराने (सेकंड-हैंड) सामान का इस्तेमाल किया।
इससे न केवल समय-समय पर होने वाली मरम्मत के नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई।
ये गड़बडि़यां तब सामने आईं, जब वर्कशाप में मरम्मत किए गए कई कोच, मरम्मत के 100 दिनों के अंदर ही खराब हो गए।
समिति ने वर्कशाप के कामकाज में कई अनियमितताएं पाईं, जैसे कि प्लांट और मशीनरी खरीदने की प्रक्रिया में गड़बड़ी और साथ ही कोचों के रखरखाव से जुड़े डाटा को दर्ज करने में भी गलतियां।
मंचेश्वर कैरिज रिपेयर वर्कशॉप की स्थापना नवंबर 1981 में रेलवे कोचों की मरम्मत के लिए की गई थी। इसकी शुरुआती मरम्मत क्षमता हर महीने 45 कोचों की थी, जिसे 2016 तक बढ़ाकर 150 कोच कर दिया गया।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने मार्च 2023 को समाप्त हुए वर्ष के लिए वर्कशॉप के कामकाज की जांच की थी। कैग ने 2025 में संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की, और समिति ने इस रिपोर्ट को विस्तार से जांचने के लिए चुना।
वर्कशाप के कामकाज की जांच करते समय समिति ने पाया कि कोचों की समय-समय पर की जाने वाली मरम्मत के अनुमान, वास्तविक निष्पादन की तुलना में अधिक रखे गए थे।