संसदीय समिति की मांग: कृषि विभाग का बजट बढ़े, किसानों को मिले ज्यादा सहायता…

 संसद की एक समिति ने जलवायु परिवर्तन और बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि विभाग के लिए बजट आवंटन को बढ़ाने की सिफारिश की है।

कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी संसद की स्थायी समिति ने सोमवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग और किसान कल्याण से जुड़ी अनुदान मांगों पर अपनी रिपोर्ट पेश की।

समिति ने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर सब्सिडी देने और छोटे व सीमांत किसानों के बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की है।

समिति ने सुझाव दिया कि खेती में एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाए, ताकि पानी, उर्वरक और अन्य कृषि संसाधनों का सही मात्रा में और बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया कि कृषि विभाग के लिए केंद्रीय बजट में आवंटन का हिस्सा लगातार घट रहा है।

वित्त वर्ष 2022-23 में यह केंद्र के कुल परिव्यय का 3.14 प्रतिशत, 2023-24 में 2.57 प्रतिशत, 2024-25 में 2.54 प्रतिशत, 2025-26 में 2.51 प्रतिशत और 2026-27 में 2.44 प्रतिशत रहा है। इससे स्पष्ट है कि बजट में कृषि विभाग का हिस्सा लगातार कम हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में कृषि विभाग के लिए 1,30,561.39 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है, जबकि 2024-25 में वास्तविक खर्च 1,29,933.47 करोड़ रुपये था।

इस तरह दो वर्षों में केवल 627.91 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है, जो लगभग 0.5 प्रतिशत की नाममात्र बढ़ोतरी है और इसमें महंगाई को भी शामिल नहीं किया गया है।

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