Papmochani Ekadashi Vrat Katha: पापमोचनी एकादशी पर इस कथा का पाठ जरूर करें, व्रत का मिलेगा पूरा फल…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

 पापमोचनी एकादशी का व्रत (Papmochani Ekadashi 2026) चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है।

यह व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिल सकती है। अगर आप भी एकदाशी व्रत करते हैं, तो इसकी कथा का पाठ जरूर करें। चलिए पढ़ते हैं पापमोचनी एकादशी की व्रत की दिव्य कथा।

पापमोचनी एकादशी कथा

प्राचीन काल में चैत्ररथ नामक एक बहुत ही सुंदर वन था, जहां मेधावी ऋषि (महर्षि च्यवन के पुत्र) कठिन तपस्या में लीन थे। एक दिन गंधर्वों के राजा चित्ररथ उस वन में आए। उनके साथ उनकी अप्सराएं भी थी, जिसमें से एक थी मंजुघोषा, जो अत्यंत सुंदर थी।

उसकी नजर तपस्या में लीन मेधावी ऋषि पर पड़ी और उसने अपनी सुंदरता और मधुर संगीत से ऋषि को आकर्षित करने का निश्चय किया।

कामदेव की सहायता से वह अपने प्रण में सफल रही और ऋषि मेधावी अपनी तपस्या छोड़कर मंजुघोषा के प्रेम में पड़ गए।

प्रेम में पड़कर ऋषि अपनी साधना और समय का बोध पूरी तरह भूल चुके थे। मंजुघोषा के साथ ऋषि 57 वर्ष तक रहे, जिससे उनका तप नष्ट हो गया।

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