भारत में इजरायल के राजदूत, रूवेन अजार ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही सीजफायर बातचीत में पाकिस्तान की ‘मध्यस्थ’ की भूमिका पर संदेह जताया है।
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अजार ने कहा, “हम पाकिस्तान को एक विश्वसनीय खिलाड़ी के तौर” पर नहीं देखते। मुझे लगता है कि अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली सेवाओं का इस्तेमाल करने का फैसला किया है।
उन्होंने आगे कहा कि, “तेल अवीव का मकसद दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के आतंकवाद को खत्म करना है। इसका ईरान में चल रहे ऑपरेशन से कोई लेना-देना नहीं है। जहां तक लेबनान की बात है, जैसा कि मैंने कहा, हमें एक ऐसी स्थिति हासिल करनी है, जिसमें दक्षिणी लेबनान को हिज्बुल्लाह के आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसा करना लेबनानी सरकार की भी जिम्मेदारी है। इसके अलावा जहां तक ईरान की बात है, हमें उम्मीद है कि इस बातचीत के जरिए वे शर्तें पूरी होंगी जो 15-सूत्रीय योजना का हिस्सा हैं।”
लेबनान में किए गए हमले को लेकर दी जानकारी
इजरायली दूत ने कहा कि तेल अवीव की ओर से पिछले कुछ घंटों में एक बहुत बड़ा ऑपरेशन चलाया गया है। हमने पूरे लेबनान में 250 से ज्यादा हिज्बुल्लाह आतंकवादियों को मार गिराया है। हम इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि पिछले साल सामने रखी गई संघर्ष-विराम की शर्तों को हर हाल में बनाए रखना होगा।
हम लिटानी नदी के दक्षिण में हिज्बुल्लाह की मौजूदगी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते। उन्हें पूरी तरह से निहत्था करना होगा। और हम लेबनानी सरकार से यह उम्मीद करते हैं कि, वह इस मामले में कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अमेरिका-ईरान संघर्ष-विराम का किया समर्थन
ईरान के साथ संघर्ष-विराम के मुद्दे पर बात करते हुए, रूवेन अजार ने उम्मीद जताई कि इस बातचीत के परिणाम सकारात्मक होंगे। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन रोकेगा। हमने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि हम इस संघर्ष-विराम का पूरी तरह से समर्थन करते हैं, और अब अमेरिका की अगुवाई में इस मुद्दे पर बातचीत का दौर शुरू होने वाला है।
ईरान ने समझौता तोड़ने की कही थी बात
बता दे कि यह बातें तब सामने आई है। जब बुधवार को ईरान ने इजरायल पर यह आरोप लगाया कि वह अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष-विराम को खतरे में डाल रहा है। जिसके तहत दोनों पक्षों ने दो हफ्तों के लिए आपसी शत्रुता को रोकने का फैसला किया था।
ईरान ने इस दौरान यह चेतावनी भी दी कि, इजरायली सेना द्वारा लेबनान पर लगातार किए जा रहे हमलों के कारण यह समझौता पूरी तरह से टूट सकता है। और इसके परिणाम यह होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर से तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी यह स्पष्ट किया है कि लेबनान इस संघर्ष-विराम समझौते का हिस्सा बिल्कुल भी नहीं है।