304 मेगावाट क्षमता की मनेरी भाली फेज-2 जल विद्युत परियोजना की हेड रेस टनल अंदर से एक वर्ग मीटर में टूटफूट मिली है। वहीं, टूटफूट वाले स्थान पर 40 वर्ग सेमी तक दरारें पाई गई हैं। बीते फरवरी माह में रिमोड आपरेटेड व्हीकल(आरओवी) की मदद से दो दिनों तक चले सर्वे के बाद जल विद्युत निगम के अधिकारियों ने यह प्राथमिक जानकारी दी है।
हालांकि अधिकारियों ने इससे सुरंग को किसी भी तरह के खतरे से इनकार किया है उनका कहना है कि सर्वे की फाइनल रिपोर्ट इस माह के अंत तक आ जायेगी, जिसकी विशेषज्ञ समिति समीक्षा करेगी।उसके बाद सुरंग की मरम्मत की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
बता दें कि मनेरी भाली फेज-2 जल विद्युत परियोजना वर्ष 2008 में बनकर तैयार हुई थी, जिसमें निर्माण के बाद ही जोशियाड़ा बैराज से धरासू तक जाने वाली 16 किमी लंबी हेड रेस टनल में गमरीगाड क्षेत्र के आसपास रिसाव की समस्या सामने आ गई थी, जो कि वर्ष 2021 से गंभीर रुप से बनी हुई है और रिसाव की रोकथाम को निगम के द्वारा अब तक करीब चार करोड़ रुपए की धनराशि खर्च की जा चुकी है। बावजूद इसके सुरंग से करीब 800 से 1500 लीटर प्रति सेकंड पानी का रिसाव जारी है।
समस्या को गंभीरता से लेते हुए गत 9 व 10 फरवरी को जल विद्युत निगम ने पूरे प्रदेश में पहली बार परियोजना की सुरंग के अंदर से हो रहे पानी के रिसाव का पता लगाने के लिए रिमोड आपरेटेड व्हीकल को सुरंग के अंदर उतारा था।
पानी के अंदर हाई फ्रीक्वेंसी सोनार तरंगों की मदद से सुरंग में दरारों, क्षतिग्रस्त व खोखले हिस्सों का पता लगाने के लिए दो दिन तक सर्वे किया, जिसमें गमरीगाड चिन्यालीसौड़ क्षेत्र के ऊपर सुरंग के अंदर एक वर्ग मीटर तक सुरंग की दीवार के क्षतिग्रस्त होने का पता चला। इसके आसपास करीब 40 वर्ग सेमी तक दाररें पायी गई हैं।