“एक बार पत्नी को माफ करने के बाद दोबारा उसी आधार पर तलाक नहीं मांगा जा सकता”-छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह टिप्पणी की है…

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विवाह विच्छेद के एक मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि दहेज प्रताड़ना के केस से बरी होने के बाद पति-पत्नी सात साल तक साथ रहे।

पति ने पत्नी की गलतियों को माफ कर दिया। इसके बाद फिर तलाक नहीं मांग सकते।

जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फैसले में कहा कि पत्नी द्वारा दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराने और प्रकरण से बरी होने के बाद पति-पत्नी लंबे समय तक साथ रह चुके हैं।

ऐसी परिस्थितियों में पुराने आरोप को सामने रखकर इस आधार पर तलाक मांगना स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि पति-पत्नी के लंबे समय तक साथ रहने से इस तरह के मामलों में क्रूरता या फिर अवैध संबंध जैसे आरोप माफ माने जाएंगे।

बता दें कि पति की याचिका पर सुनवाई के बाद जांजगीर परिवार न्यायालय ने तलाक की डिक्री को मंजूरी दी थी। परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए पत्नी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

इससे पहले पत्नी ने पति पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराया था, जिसमें वह बरी हो गया। इसके बाद दोनों करीब सात साल तक साथ रहे। इसके बाद पति तलाक लेना चाहता था।

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