निजाम वंश की ऐतिहासिक संपत्तियों को लेकर चल रहे हाई-प्रोफाइल केस में एक अहम मोड़ आया है। हैदराबाद की एक दीवानी अदालत ने एक अंतरिम आवेदन को खारिज करते हुए नवाब नजफ अली ख़ान द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है।
यह मामला नवाब मीर उस्मान अली खान बहादुर (निजाम VII) की विरासत संपत्तियों से जुड़ा है, जिनमें फलकनुमा पैलेस, चौमहल्ला पैलेस, पुरानी हवेली, किंग कोटी पैलेस (नजरी बाग) और तमिलनाडु के ऊटी स्थित हेयरवुड सीडर्स बंगला शामिल हैं। इन संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत करीब 10,000 करोड़ बताई गई है।
नजफ अली खान निजाम VII के वैध उत्तराधिकारियों में से एक हैं। उन्होंने संपत्तियों में 0.44% हिस्सेदारी और उसके शांतिपूर्ण कब्जे की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया था। इन संपत्तियों की कीमत करीब 44 करोड़ रुपये है।
प्रतिवादियों ने अदालत में दावा किया कि वे इन संपत्तियों के कानूनी स्वामी हैं और नजफ अली खान का उन पर कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वादी ने संपत्तियों का मूल्यांकन जानबूझकर कम दिखाया है ताकि तेलंगाना कोर्ट फीस एंड सूट वैल्यूएशन एक्ट, 1956 की धारा 34(1) के तहत देय शुल्क से बचा जा सके।
प्रतिवादियों ने बताया कि इनमें से एक संपत्ति को ताज ग्रुप को लीज पर देकर सेवन स्टार होटल में बदला जा चुका है, जिससे इन संपत्तियों का व्यावसायिक महत्व और बढ़ गया है।
वहीं, वादी पक्ष ने कहा कि उसने सभी आवश्यक कोर्ट फीस नियमों के अनुसार जमा की है और 2018 में प्रतिवादियों के बीच हुई एक सेल डीड को अवैध घोषित करने की मांग की।
कोर्ट ने कहा कि विक्रेता के पास उस समय स्वामित्व का अधिकार ही नहीं था।
मामले की सुनवाई करते हुए दीवानी न्यायाधीश आर. डैनी रूथ ने अपने आदेश में कहा, “मुकदमे का मूल्यांकन और कोर्ट फीस दोनों ही तथ्यात्मक मुद्दों से जुड़ी बातें हैं।
स्वामित्व, कब्जा और पारिवारिक संबंध को बिना पूर्ण सुनवाई के तय नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने 1 अगस्त के आदेश में कहा कि इस प्रारंभिक चरण में यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि वादी संपत्ति के कब्जे से पूरी तरह बाहर है। इसलिए, अदालत ने मूल मुकदमे को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।