खोखले हो चुके लश्कर-ए-तैयबा की नई रणनीति सामने आई, AI का इस्तेमाल कर फैलाया जा रहा भ्रम…

खुफिया एजेंसियों को हाल के महीनों में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की गतिविधियों को लेकर नई जानकारियां मिली हैं।

आपरेशन ¨सदूर के बाद कमजोर पड़ा यह आतंकी संगठन अब भ्रम और प्रचार के सहारे खुद को फिर से सक्रिय दिखाने की कोशिश कर रहा है।

एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा कभी महिला विंग बनाने की बात करता है, तो कभी बच्चों की भर्ती का दावा करता है।

इन घोषणाओं का मकसद असल ताकत दिखाना नहीं, बल्कि भारतीय एजेंसियों को उलझाना और डर का माहौल बनाना है।हाल के दिनों में समुद्र के रास्ते हमले की बात भी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि इस तरह के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित मरकज ए मुस्लिम लीग को दी गई है, जो जमात उद दावा (जेयूडी) का राजनीतिक ¨वग है।

गौरतलब है कि जेयूडी लश्कर ए तैयबा का वित्तीय धड़ा है, जिसने मुंबई में 26/11 हमलों को अंजाम दिया था।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इन दावों का पैमाना बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है।एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “ये अधिकतर मनोवैज्ञानिक खेल हैं।

वीडियो और बयानों के जरिए भ्रम फैलाया जाता है ताकि एजेंसियां हर सूचना को लेकर सतर्क रहें।”

युवाओं को लुभाने के लिए फर्जी पोस्टरबाजीभर्ती में दिक्कतों के चलते लश्कर ने नया तरीका अपनाया है।

पाकिस्तान में फर्जी पोस्टर लगाए जा रहे हैं, जिनमें तैराकी या जल-रक्षा प्रशिक्षण का विज्ञापन किया जाता है। बाद में युवाओं को असली मंशा का पता चलता है। कुछ लोग वापस लौट जाते हैं, जबकि कुछ फंस जाते हैं।

एआइ की मदद से फर्जी वीडियो बनाए जा रहे

एजेंसियों का कहना है कि अब संगठन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का भी इस्तेमाल कर रहा है। कम संख्या में चल रहे प्रशिक्षण को वीडियो में सैकड़ों लोगों का दिखाया जाता है, ताकि प्रभाव ज्यादा लगे।

हालांकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इन दावों को हल्के में नहीं ले रही हैं। अधिकारियों का साफ कहना है कि भले ही यह प्रचार ज्यादा हो, लेकिन किसी भी खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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