भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराध रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) एक बेहद असामान्य, लेकिन कड़ा कदम उठाने जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि बीएसएफ भारत-बांग्लादेश सीमा पर नदियों वाले संवेदनशील इलाकों में मगरमच्छ और सांप छोड़ने की संभावना पर विचार कर रहा है।
इस योजना पर नौ फरवरी को दिल्ली में बीएसएफ के मुख्यालय में हुई एक बैठक के दौरान चर्चा की गई थी। इसके बाद 4096 किलोमीटर लंबी सीमा पर तैनात स्थानीय इकाइयों से उनकी राय मांगी गई।
सीमा सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह एक विचार है, जिस पर फरवरी में बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में चर्चा की गई थी।
इस विचार का मकसद योजना की व्यावहारिकता का पता लगाना है। बीएसएफ स्थानीय कमांडरों द्वारा भेजी गई प्रतिक्रियाओं का अध्ययन कर रहा है।
क्यों पड़ रही इसकी जरूरत?
गृह मंत्रालय का कहना है इस सीमा का लगभग 856 किलोमीटर हिस्सा अब भी बिना बाड़ के है, जिसका कारण घने जंगल और नदियों वाले इलाकों जैसी कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हैं।
ऐसे में बीएसएफ ने प्रस्ताव दिया है कि गृह मंत्री के निर्देशों के अनुरूप अभियान संबंधी सफलता हासिल करने के लिए नदियों वाले संवेदनशील इलाकों में सांप और मगरमच्छ जैसे रेंगने वाले जीवों को छोड़ने की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए।
व्यावहारिकता को लेकर संदेह
इस योजना की व्यावहारिकता को लेकर संदेह भी जताया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि कई स्थानीय कमांडरों ने यह बात उठाई कि नदियों वाले इलाकों में रेंगने वाले जीवों को छोड़ना व्यावहारिक नहीं है।
सीमा के कई इलाकों में आबादी रहती है और बाढ़ के दौरान अगर ये जानवर वहां मौजूद हों तो स्थानीय लोगों के लिए समस्या खड़ी हो सकती है।
उपकरणों से भी निगरानी का प्रस्ताव
एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि इस सीमा को सुरक्षित बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के तकनीकी उपकरणों और निगरानी गैजेट को तैनात करने के कई अन्य प्रस्ताव भी हैं।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर पड़ोसी देश से घुसपैठ का खतरा बना रहता है। साथ ही मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा और हथियारों व गोला-बारूद की तस्करी जैसे विभिन्न सीमा-पार अपराध भी होते रहते हैं।