बांग्लादेश में न विधानसभा, न मुख्यमंत्री… जानिए कैसी होती है आम चुनाव प्रक्रिया और कैसे चुना जाता है प्रधानमंत्री…

बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए मतदान जारी है। इसबार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी मुख्य पार्टियां हैं। बीएनपी और जमात पार्टी पहले गठबंधन में चुनाव लड़ती थी, लेकिन शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव से बैन किए जाने के बाद जमात और बीएनपी अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं।

ये चुनाव दशकों में देश के दो सबसे अहम राजनीतिक शख्सियतों के बगैर होने वाले पहले चुनाव होंगे। इस चुनाव में शेख हसीना और दिवंगत खालिदा जिया नहीं होंगी।

बांग्लादेश के लोग पूरी तरह से बदले हुए राजनीतिक माहौल में अपना वोट देंगे। ऐसे वक्त में खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान राजनीतिक खालीपन को भर रहे हैं।

बांग्लादेश में वोटिंग प्रणाली कैसे काम करती है?

बांग्लादेश में कुल 12,77,11,793 पंजीकृत मतदाता हैं। इसमें देश के अंदर और बाहर से पोस्टल बैलट के माध्यम से वोट करने के लिए पंजीकृत लोग भी शामिल हैं।

यह पहली बार है जब पोस्टल वोटिंग की सुविधा दी गई है। इस सुविधा से लगभग 1.5 करोड़ विदेशी मजदूरों को लाभ मिल रहा है।

बांग्लादेश में एक ‘एकसदनीय’ विधायिका है। जैसे भारत में दो विधायिका है, मसलन लोकसभा और राज्यसभा। भारत में दोनों सदन मिलकर कानून बनाते हैं।

लेकिन बांग्लादेश में एक ही विधायी सदन है, जिसे जतीया संसद या राष्ट्र का सदन कहा जाता है। इसमें कुल 350 निर्वाचन क्षेत्र हैं। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में एक एकल-सदस्यीय सीट होती है।

फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) चुनाव प्रणाली के माध्यम से 300 सदस्यों का चुनाव होता है, जबकि बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और इन्हें चुनाव परिणामों के बाद पार्टियों को उनके अनुपात में आवंटित किया जाता है। मिसाल के लिए, यदि अगर पार्टी 60 सीटें जीतती है, तो उसे 10 आरक्षित सीटें मिलती हैं। इन आरक्षित सीटों पर महिला राजनेताओं को आवंटित किया जाता है।

क्या होता है फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट वोटिंग सिस्टम?

फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट चुनाव प्रणाली एक बहुत ही सरल और दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मतदान पद्धति है। इसे हिंदी में साधारण बहुमत प्रणाली, सरल बहुमत प्रणाली या बहुलवादी प्रणाली भी कहते हैं।

इस प्रणाली के तहत, देश या राज्य को छोटे-छोटे निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा जाता है। हर निर्वाचन क्षेत्र से केवल एक प्रतिनिधि चुना जाता है। मतदाता अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों में से केवल एक को वोट देता है। 

कुछ देशों में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट के जरिए वोटिंग होती है जिसमें मतदाता को सभी उम्मीदवारों को वरीयता के आधार वोट करना होता है। लेकिन फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट में सिर्फ एक ही उम्मीदवार को वोट देना होता है।

इसे ऐसे भी समझे कि मान लीजिए एक निवार्चन सीट पर 4 उम्मीदवार हैं और कुल 1,00,000 वोट पड़े हैं।

– उम्मीदवार A → 38,000 वोट
– उम्मीदवार B → 32,000 वोट
– उम्मीदवार C → 20,000 वोट
– उम्मीदवार D → 10,000 वोट

ऐसी स्थिति में उम्मीदवार A जीत जाएगा क्योंकि उसे सबसे ज्यादा वोट मिले, भले ही उसके खिलाफ 62,000 वोट (बहुमत) पड़े हों। भारत में भी आम चुनाव में इसी प्रणाली का इस्तेमाल होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *