गुजरात: राजकोट के वेजा गांव में मच्छरों का कहर, शादियां करना भी हुआ मुश्किल…

गुजरात के राजकोट जिले के वेजा गांव में मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि कोई भी मेहमान रात भर ठहरने की हिम्मत नहीं करता।

स्थानीय लोगों के अनुसार, दिन में आने वाले रिश्तेदार भी शाम ढलते ही मच्छरों की भारी भरकम सेना से घबरा कर विदा हो जाते हैं।

इस समस्या ने गांव की सामाजिक जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। आसपास के गांवों के लोग अब वेजा गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से साफ मना कर रहे हैं।

युवाओं की शादी का सबसे बड़ा रोड़ा मच्छर बन गए हैं। कई परिवारों के लड़के शादी के योग्य हो चुके हैं, लेकिन मच्छरों के डर से रिश्ते नहीं टिक पा रहे हैं।

पशुओं के लिए भी लग रही बड़ी-बड़ी मच्छरदानियां, दूध उत्पादन घटा

इंसानों की परेशानी से कम नहीं है पशुओं की हालत। पशुपालक अब अपने बाड़ों में बड़ी-बड़ी मच्छरदानियां टांगने को मजबूर हैं।

मच्छरों के काटने से पशु लगातार बीमार पड़ रहे हैं, जिसके कारण दूध का उत्पादन तेजी से घट रहा है।

कुछ किसान तो मच्छरों से तंग आकर अपना पशुधन बेचने पर उतारू हो गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि मच्छरों के कारण जो कमाई होती है, उसका बड़ा हिस्सा दवाइयों और मच्छरदानियों पर खर्च हो जाता है। हर 5-6 महीने में मच्छरदानियां फट जाती हैं, जिससे नया आर्थिक बोझ पड़ता है।

7-8 साल से जूझ रहे हैं ग्रामीण, प्रशासन सिर्फ पाउडर छिड़कता है

वेजा गांव में यह समस्या पिछले 7-8 वर्षों से लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के आसपास जमा गंदा पानी और जलकुंभी (गांडी वेल) के कारण मच्छरों की संख्या अनियंत्रित हो गई है।

लोगों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन स्थायी समाधान की बजाय अधिकारी केवल मच्छरनाशक पाउडर छिड़ककर खानापूर्ति कर लेते हैं।

समस्या इतनी गंभीर है कि जब कोई विभाग काम करने जाता है, तो दूसरे विभाग वाले कह देते हैं कि “यह क्षेत्र हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता”।

‘प्रशासन हाथ खड़े कर दे तो हम कैसे जिएंगे’ – गांववालों का सवाल

वेजा गांव के लोग अब सवाल कर रहे हैं कि अगर प्रशासन ही इस समस्या से निपटने में असमर्थ है, तो हजारों मच्छरों के बीच वे अपनी जिंदगी कैसे गुजारेंगे?

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तुरंत गंदे पानी की निकासी करे, जलकुंभी साफ करे और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए स्थायी उपाय करे, ताकि गांव की सामाजिक और आर्थिक जिंदगी फिर से पटरी पर आ सके।

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