आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यह नहीं चाहता कि इतिहास में उसका नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाए, बल्कि वह पिछले 100 वर्षों में किए गए अपने कार्यों का पूरा श्रेय समाज को देना चाहता है।
आरएसएस का संपूर्ण कार्य स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत पर आधारित है, न कि किसी की कृपा पर। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदुत्व संगठन के कार्य में किसी की कृपाहीनता का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
मोहन भागवत नागपुर के रेशमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस की घोष पाठक (बैंड मंडली) के इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘राष्ट्र स्वराधना’ के विमोचन के अवसर पर मोहन भगवत बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सभी स्वयंसेवकों ने आरएसएस की विचारधारा के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में अपना पूरा बल लगाया है। भगवत ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पुस्तक स्वयंसेवकों के लिए बहुत उपयोगी है।
इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि 1925 में स्थापना के बाद आरएसएस ने क्या किया है और आगे क्या करना चाहिए।आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि संगठन ने अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरे समाज की सामूहिक शक्ति और कार्यशक्ति पर भरोसा किया है, किसी व्यक्ति विशेष की कृपा पर नहीं।