छतीसगढ़ के महासमुंद जिले में 32 वर्षीय युवक की दुर्घटना एक मेडिकल थ्रिलर की कहानी से कम नहीं है। निर्माणाधीन इमारत से गिरने के बाद युवक की 20 से अधिक पसलियां टूट गईं और उसके डायफ्राम में बड़ा छेद हो गया।
इसके परिणामस्वरूप उसके लिवर, आंत और आमाशय सीने में घुस गए। आश्चर्यजनक रूप से युवक के शरीर पर कोई बाहरी खरोंच नहीं थी और वह पूरी तरह से होश में था। इस गंभीर स्थिति में, रायपुर एम्स के चिकित्सकों ने पांच घंटे तक जटिल सर्जरी कर युवक की जान बचाई।
22 फरवरी को युवक इमारत से गिरा, लेकिन प्रारंभ में उसे कोई गंभीर समस्या नहीं लगी। अगले दिन, सीने में दर्द और सांस फूलने की शिकायत पर वह स्थानीय सरकारी अस्पताल गया, जहां उसे मामूली दवा देकर भेज दिया गया। जब दर्द बढ़ गया, तो 24 फरवरी को एक निजी अस्पताल में सीटी स्कैन कराया गया।
रिपोर्ट देखकर चिकित्सक भी चकित रह गए और उसे तुरंत एम्स रायपुर रेफर किया गया। वहां की जांच में पता चला कि बाईं ओर के डायफ्राम में सात-आठ सेंटीमीटर का बड़ा छेद हो गया है, साथ ही रीढ़ की हड्डी और हाथ-पैरों में भी फ्रैक्चर थे।
डॉ. राधाकृष्ण रामचंदानी के नेतृत्व में सर्जरी टीम ने बिना समय गंवाए इस जटिल आपरेशन को अंजाम दिया। चिकित्सकों ने एक बड़ा चीरा लगाया, जिससे छाती और पेट दोनों हिस्सों में काम करने की जगह मिली। सीने में घुसे आंत, लिवर और आमाशय को सावधानी से निकाला गया और उन्हें पेट में सही स्थान पर रखा गया।
युवक की 20 से अधिक पसलियां टूटी हुई थीं, जिससे सांस लेने में अत्यधिक दर्द हो रहा था। दर्द के कारण वह गहरी सांस नहीं ले पा रहा था, जिससे निमोनिया का खतरा बढ़ गया।
इस स्थिति से बचने के लिए, चिकित्सकों ने उसे 15 दिनों तक दर्द निवारक दवाएं दीं, ताकि वह सामान्य रूप से सांस ले सके। अंतत:, पोस्ट-आपरेटिव देखभाल के बाद, युवक 15 दिन बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गया।