किडनी कांड के अवैध धंधे (किडनी कांड) में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना और 25,000 रुपये के इनामी रोहित को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद रोहित ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
अब तक की जांच में रोहित एनेस्थीसिया का विशेषज्ञ डॉक्टर बताया जा रहा था, लेकिन पुलिस की पूछताछ में यह सफेद झूठ पकड़ा गया।
पकड़े जाने के बाद साफ हुआ कि खुद को डॉक्टर कहने वाला रोहित सिर्फ इंटर पास है। उसने मेडिकल लाइन की कोई भी औपचारिक पढ़ाई या डिग्री हासिल नहीं की है। बिना किसी अनुभव और शिक्षा के वह लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा था।
अनट्रेंड और फर्जी लोग संचालित कर रहे थे गिरोह
इस गिरोह ने अब तक जितने भी अवैध ऑपरेशन किए या जिन लोगों से किडनी खरीदी थी, उनमें से कई लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इसका मुख्य कारण यह था कि पूरे गिरोह को रोहित जैसे अनट्रेंड और फर्जी लोग संचालित कर रहे थे। किडनी कांड में यह दसवीं बड़ी गिरफ्तारी है।
30 मार्च को सामने आया था किडनी कांड
किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह से जुड़ा यह मामला 30 मार्च को सामने आया था। केशवपुरम के आहूजा अस्पताल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर का किडनी ट्रासप्लांट किया गया था। बिहार के बेगूसराय के भगवानपुर निवासी आयुष ने दलालों के माध्यम से अपनी किडनी बेची थी।
गिरोह में अब कुल 10 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
पुलिस की जांच में सामने आया था कि इस पूरे रैकेट का सरगना गाजियाबाद का रोहित है। फिलहाल रोहित गिरफ्तार हो गया है। इससे पहले भी 9 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
पारुल का किडनी ट्रांसप्लांट रोहित के साथ अली उर्फ मुद्दसर अली सिद्दीकी और डॉ. अफजाल ने किया था, जबकि उसकी टीम में ओटी मैनेजर राजेश कुमार, ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह समेत नौ से 10 लोग शामिल हैं। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने पिछले दिनों रोहित और उसके दो साथी डॉ. अली और डॉ. अफजाल पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
बता दें कि अफजाल, मेरठ के अल्फा अस्पताल में काम करता था। किडनी के मरीज और बेचने वालों की तलाश की जिम्मेदारी इसी पर है। वहीं डॉ. अली ओटी टेक्नीशियन है। बताया जा रहा है कि पारुल का ऑपरेशन अली ने ही किया था।