पांच करोड़ के इनामी माओवादी कमांडर देवजी ने किया सरेंडर, तेलंगाना पुलिस के सामने छोड़े हथियार…

प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के सबसे वांछित शीर्ष कमांडरों में से एक तथा मुख्य रणनीतिकार थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने रविवार को तेलंगाना के मुलुगु जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उस पर कुल पांच करोड़ रुपये का इनाम था।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के ‘माड़’ क्षेत्र से सक्रिय और केंद्रीय सैन्य आयोग के प्रभारी के रूप में कार्यरत देवजी का आत्मसमर्पण नेतृत्व की कमी से जूझ रहे इस संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। एक शीर्ष खुफिया सूत्र ने कहा, “संगठन के इतिहास में इस स्तर का कोई अन्य नेता नहीं है जिसने आत्मसमर्पण किया हो।”

जानकारी के मुताबिक, 63 वर्षीय देवजी के साथ ओडिशा राज्य प्रभारी और केंद्रीय समिति सदस्य 73 वर्षीय मल्लाराजी रेड्डी उर्फ संग्राम एवं 16 अन्य माओवादियों ने भी हथियार डाले हैं। संग्राम पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था।

किसके हाथों में गई कमान

भाकपा (माओवादी) के महासचिव नम्बाला केशव राव उर्फ बसव राजू के मारे जाने के बाद संगठन की कमान पहले सेंट्रल रीजनल ब्यूरो प्रभारी मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति के पास थी।

भूपति के 15 अक्टूबर 2025 को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आत्मसमर्पण के बाद संगठन की कमान अघोषित रूप से देवजी के हाथों में आ गई।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण की प्रक्रिया कुछ दिनों में पूरी की जाएगी और फिलहाल ये लोग तेलंगाना पुलिस की निगरानी में हैं।

प्रेट्र के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सोमवार को मीडिया के सामने पेश किए जाने की संभावना है।

यह आत्मसमर्पण केंद्र सरकार द्वारा देश से माओवाद खत्म करने के लिए तय की गई मार्च 2026 की समय सीमा से ठीक पहले हुआ है।

तेलंगाना के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने हाल ही में माओवादियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी। राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास योजना’ के तहत उन्हें सहायता प्रदान की जाएगी।

तेलंगाना में 588 माओवादी सामान्य जीवन में वापस लौटे

पिछले दो वर्षों में तेलंगाना पुलिस के प्रयासों से अब तक 588 माओवादी सामान्य जीवन में वापस लौट चुके हैं।

सफर की शुरुआत और उत्थान देवजी की ¨हसक गतिविधियां 1982 में शुरू हुईं, जब वह जगतियाल जिले के कोरुतला में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान रेडिकल स्टूडेंट यूनियन (आरएसयू) की विचारधारा से प्रभावित हुआ।

इसी दौरान करीमनगर में आरएसयू और एबीवीपी के बीच हुए संघर्षों में उसे आरोपी बनाया गया था। वह पार्टी की सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो का प्रमुख सदस्य था। उसने ‘पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

चार दशकों का भूमिगत जीवन

  • 1983: वह भाकपा माले (पीपल्स वार ग्रुप) में शामिल हुआ और भूमिगत हो गया।
  • 1983-84: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली दलम में एक सदस्य के रूप में कार्य किया।
  • 1985: उसकी पदोन्नति क्षेत्र समिति सदस्य के रूप में हुई।
  • 2001: उसे केंद्रीय समिति के सदस्य के रूप में बड़ी जिम्मेदारी मिली।
  • 2016: उसे केंद्रीय सैन्य आयोग का प्रभारी बनाया गया।

अब सुरक्षा बलों के निशाने पर ये माओवादी पोलित ब्यूरो व सेंट्रल कमेटी सदस्य

  • गणपति (एम. लक्ष्मण राव), 74 वर्ष, सलाहकार, सेंट्रल कमेटी
  • मिशिर बेसरा (भास्कर), 63 वर्ष, प्रभारी, ईआरबी (ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो), झारखंड सेंट्रल कमेटी के अन्य सदस्य
  • अनल दा उर्फ तूफान (सचिव, बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी; सारंडा जंगल क्षेत्र में सक्रिय)
  • सब्यसाची गोस्वामी उर्फ अजय दा (सचिव, पश्चिम बंगाल-आसाम एरिया कमेटी) 

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