पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच इस्लामाबाद में युद्धविराम को लेकर बातचीत शुरू हो गई है।
यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली बार है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत हो रही है। हालांकि, बातचीत की शुरुआत के बावजूद कई बड़े मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बैठक से पहले कहा कि हमें जल्द पता चल जाएगा क्या हो रहा है और उन्होंने दावा किया कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है।
वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि औपचारिक बातचीत शुरू करने से पहले उसकी कुछ शर्तें पूरी होनी जरूरी हैं।
ईरान की मुख्य मांगों में लेबनान में युद्धविराम, उसके फंसे हुए पैसे की रिहाई, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और क्षेत्र में शांति शामिल हैं। इन मुद्दों पर सहमति बनना बातचीत के लिए अहम माना जा रहा है।
लेबनान बना सबसे बड़ा विवाद
बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा लेबनान का है। ईरान चाहता है कि वहां तुरंत युद्धविराम हो, जहां इजराइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई में करीब 2000 लोगों की मौत हो चुकी है।
इजराइल और अमेरिका का कहना है कि लेबनान का संघर्ष अलग है, लेकिन ईरान इसे सीधे तौर पर इस युद्ध से जुड़ा मानता है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो बातचीत बेकार हो जाएगी।
वहीं अमेरिका ने संकेत दिया है कि इजराइल अब अपने अभियान को थोड़ा धीमा कर सकता है और अगले हफ्ते अमेरिका में इजराइल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत हो सकती है।
होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम पर टकराव
होर्मुज जलडमरूमध्य भी बड़ा विवाद बना हुआ है। ईरान इस पर अपना नियंत्रण चाहता है और जहाजों से शुल्क लेने की बात कर रहा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यह रास्ता बिना किसी रोक-टोक के खुला रहे।
फिलहाल इस रास्ते से बहुत कम जहाज गुजर रहे हैं और हजारों नाविक खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। ईरान ने हाल ही में नए समुद्री रास्तों का ऐलान भी किया है, ताकि बारूदी सुरंगों से बचा जा सके।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी एक बड़ा मुद्दा है। ईरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखना चाहता है, लेकिन अमेरिका इसके खिलाफ है। इसके साथ ही मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
प्रतिबंध, संपत्ति और सेना पर विवाद
ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके ऊपर लगे प्रतिबंध हटाए और विदेशों में जमा उसकी संपत्ति को जारी करे। इन फंसे हुए पैसों की रकम करीब 6 अरब डॉलर बताई जा रही है।
हालांकि अमेरिका ने साफ किया है कि वह तभी राहत देगा जब ईरान परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर समझौता करेगा। वहीं व्हाइट हाउस ने इस बात से इनकार किया है कि अमेरिका ने अभी कोई पैसा छोड़ने पर सहमति दी है।
ईरान की एक और मांग है कि अमेरिका अपनी सेना को क्षेत्र से हटाए और सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म करे। लेकिन ट्रंप ने कहा है कि अंतिम शांति समझौते तक अमेरिकी सेना वहां बनी रहेगी और अगर ईरान ने शर्तें नहीं मानीं तो संघर्ष और बढ़ सकता है।