सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र को कोविड-19 वैक्सीनेशन के बाद होने वाले गंभीर साइड इफेक्ट्स के लिए नो-फॉल्ट मुआवजा नीति बनाने का निर्देश दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि वैक्सीनेशन के बाद होने वाली साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम जारी रहेगा।
पीठ ने साफ कर दी ये बात
जस्टिस नाथ ने फैसला सुनाते हुए कहा, “टीकाकरण के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स के साइंटिफिक असेसमेंट के मौजूदा सिस्टम को देखते हुए कोर्ट द्वारा नियुक्त किसी अलग एक्सपर्ट बॉडी की जरूरत नहीं समझी जाती है।” बेंच ने साफ किया कि उसका फैसला किसी भी व्यक्ति को कानून में मौजूद दूसरे उपायों को अपनाने से नहीं रोकेगा।
कोर्ट ने और क्या कहा?
कोर्ट ने कहा, “इसी तरह नो-फॉल्ट फ्रेमवर्क बनाने का मतलब यह नहीं निकाला जाएगा कि भारत संघ या किसी दूसरे प्राधिकरण ने अपनी जिम्मेदारी या गलती मान ली है।”
क्या है मामला?
टॉप कोर्ट ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया, जिनमें यह आरोप भी था कि 2021 में कोविशील्ड वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद दो महिलाओं की जान चली गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि वैक्सीनेशन के बाद दोनों को गंभीर साइड इफेक्ट हुए थे।