अमेरिकी संघीय अभियोजकों ने शिकागो की अदालत में मुंबई आतंकी हमलों के प्रमुख आरोपी डेविड हेडली और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के बीच गहरे संबंधों को साबित करने वाले अतिरिक्त सबूत पेश किए हैं।
अदालत में पेश किए गए कई ईमेल रिकॉर्ड्स से स्पष्ट हुआ कि हेडली आईएसआई के अधिकारियों, खासकर मेजर इकबाल (इलियास कश्मीरी ) और उनके पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ निरंतर संपर्क में था।
हेडली ने अदालत में गवाही देते हुए खुलासा किया कि आईएसआई अधिकारी मेजर इकबाल ने ‘चौधरी खान’ नाम की आईडी का इस्तेमाल किया था।
23 अप्रैल 2008 को भेजे गए एक ईमेल में हेडली ने चौधरी खान को व्यावसायिक रूप से उपलब्ध जासूसी उपकरणों, जैसे जासूसी कैमरों और पेन जासूसी कैमरों की जानकारी दी। हेडली ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि चौधरी खान वास्तव में मेजर इकबाल ही थे।
हेडली ने आगे बताया कि मुंबई हमलों से पहले वह मेजर इकबाल से कई बार मिले, जहां इकबाल ने मुंबई में कार्यालय स्थापित करने, सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों की भर्ती, निगरानी, लक्ष्यों की सूची तैयार करने और कार्यालय बंद करने तक हर कदम पर विस्तृत निर्देश दिए। हेडली के अनुसार, मेजर इकबाल ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए और वास्तव में मुंबई हमलों की साजिश के मास्टरमाइंड थे।
गवाही में हेडली ने कहा कि मेजर इकबाल ने उन्हें बताया था कि चाबाद हाउस (नरिमन हाउस) को लक्ष्यों की सूची में शामिल किया जाएगा क्योंकि यह इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का फ्रंट ऑफिस था। इकबाल मुंबई हवाई अड्डे को लक्ष्य में शामिल न करने से नाराज थे।
ये खुलासे तहव्वुर हुसैन राना की ट्रायल के दौरान हुए, जहां हेडली प्रमुख गवाह बने। अमेरिकी अभियोजकों ने ईमेल्स और अन्य सबूतों के माध्यम से आईएसआई के सीधे जुड़ाव को निर्विवाद रूप से साबित किया है।
यह मामला 26/11 मुंबई हमलों की जांच में पाकिस्तान की भूमिका पर नए सिरे से सवाल उठाता है, जहां लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने 166 लोगों की जान ली थी। फिल्म ‘धुरंधर’ में भी हेडली की भूमिका और आईएसआई कनेक्शन पर काफी चर्चा है, जो इन घटनाओं को आधार बनाकर बनी है।
फिल्म ‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल का किरदार मेजर इकबाल, इलियास कश्मीरी के प्रोफाइल (ISI, अलकायदा से संबंध) पर आधारित माना जाता है, जो भारत को अस्थिर करने की साजिश रचता है। कश्मीरी 3 जून 2011 को पाकिस्तान के FATA इलाके में अमेरिकी सीआईए के ड्रोन हमले में मारा गया था।