12 साल की उम्र में चीन छोड़ा, मजदूरी से लेकर कपड़ों का ब्रांड खड़ा किया; 78 साल की उम्र में सजा का इंतजार कर रहे जिमी लाई…

जिमी लाई हांगकांग में प्रेस की आजादी और लोकतंत्र की लड़ाई का प्रतीक बन चुके हैं। लेकिन अब वे 78 साल की उम्र में सजा का इंतजार कर रहे हैं।

हांगकांग के सबसे चर्चित मीडिया अरबपति और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता जिमी लाई का जीवन किसी फिल्मी कहानी की तरह है।

12 साल की उम्र में चीन से भागे

जिमी लाई का जन्म चीन में दिसंबर 1947 में हुआ था। वे 8 साल की उम्र में रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का सामान ढोते थे। जिमी लाई को एक दिन एक यात्री ने चॉकलेट दी।

जिमी को वो चॉकलेट इतनी पसंद आई कि उस स्वाद ने उनके भीतर हांगकांग जाने की इच्छा जगा दी। 1960 में 12 साल की उम्र में वे मछली पकड़ने वाली नाव में छिपकर अवैध रूप से हांगकांग पहुंच गए।

जिमी लाई ने खड़ा किया कपड़ों का ब्रांड

जिमी लाई ने हांगकांग आकर गारमेंट फैक्ट्री में बाल मजदूरी शुरू की। उन्होंने खुद से ही इंग्लिश सीखी और व्यापार भी सीखा। जिमी ने 1981 में जियोर्डानो नाम से कपड़ों का ब्रांड शुरू किया। इसके 30 से ज्यादा देशों में 3000 से ज्यादा स्टोर हैं।

जिमी ने लोकतंत्र के लड़ी लड़ाई

जिमी लाई 2019 में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का चेहरा बने। वे हांगकांग के उन गिने-चुने अरबपतियों में से थे, जो चीन के खिलाफ सड़कों पर उतरे। वे अरबपति होने के बावजूद हांगकांग के आम लोगों के साथ चीन के खिलाफ मार्च करते थे।

चीनी मीडिया ने जिमी को ‘गद्दार’ और विदेशी ताकतों का एजेंट कहा था। 2020 में जब चीन की पुलिस ने हांगकांग में जिमी की गिरफ्तारी की तैयारी शुरू की, तब जिमी लाई ने कहा, ‘मैं डरकर हांगकांग नहीं छोड़ूंगा।’

चीन की सरकार के खिलाफ छेड़ी लड़ाई

1989 के तियानमेन नरसंहार के बाद जिमी लाई ने पहली बार चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ लिखना शुरू किया था। 1994 में लाई ने एक आर्टिकल में तत्कालीन प्रधानमंत्री ली पेंग को बेवकूफ कहा था।

जिमी के ऐसा लिखने के बाद चीन की सरकार ने उनके कपड़ों के ब्रांड जियोर्डानो पर प्रतिबंध की कार्रवाई शुरू कर दी। तब जिमी लाई की गिरफ्तारी ने पूरा ध्यान मीडिया और राजनीति की ओर मोड़ लिया।

जिमी लाई के अखबार पर भी प्रतिबंध लग गया। 2020 में हांगकांग में नेशनल सिक्योरिटी लॉ लागू हुआ और पुलिस ने उनके अखबार एपल डेली के कार्यालय पर छापा मारा। उनकी उस समय करीब 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त कर ली गई। अखबार को चलाने के लिए पैसे नहीं थे, तब जिमी को मजबूरन 2021 में बंद करना पड़ा।

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